मोदी जी राँची में योग दिवस मना रहे हैं।  उससे मात्र 380 किलोमीटर दूर मुजफ्फरपुर में 150 से अधिक बच्चे कुपोषण के कारण असमय मृत्यु का शिकार हो चुके हैं।  देश का प्रधानमंत्री एक क्रिकेट खिलाड़ी के अंगूठे के फ़्रैक्चर पर ट्वीट कर अपनी चिंता जता रहा है , लेकिन अभी तक उन्होंने एक शब्द भी इन बच्चों की अकाल मृत्यु पर नही कहा! यह किस किस्म की संवेदनशीलता है ? चुनावी रैलियों में देश के कोने कोने में जाना वाला प्रधानमंत्री को मुजफ्फरपुर जाने का बिल्कुल भी समय नहीं है।

अंतराष्ट्रीय योग दिवस 2015 से मनाना शुरू किया गया।  जब नरेंद्र मोदी ने 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा को अपने संबोधन के दौरान कहा कि यही वो तिथि है जब उत्तरी गोलार्ध में साल का सबसे लंबा दिन है।   इसका दुनिया के कई हिस्सों में खास महत्व है।   2015 में सद्भाव और शांति के लिए योग किया गया।  2016 में युवाओं को कनेक्ट करने कर लिए योग किया गया।  2017 में स्वास्थ्य की थीम रखी गई। 2018 में शांति के लिए योग की जरूरत बताई गयी।  इस बार 2019 में योगा फॉर हार्ट की बात की जा रही है।  लेकिन इस बार की थीम तो योगा फ़ॉर चमकी बुखार ही होना चाहिए थी!

बताइये , करोड़ो अरबो रूपये योग दिवस मनाने में बर्बाद किये जा रहे है और हम अब तक मुजफ्फरपुर में 2500 बेड का अस्पताल तक नही बना पा रहे हैं जबकि हर साल वहाँ चमकी बुखार सैकड़ो बच्चों की जान लेता है!

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