उन्नाव रेप केस की पीड़िता ने इंसाफ के लिए हर दरवाजा खटखटाया, लेकिन उसे इंसाफ नही मिला। पिछले 12 जुलाई 2019 को पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को भी खत लिखा।  उसने इस खत मे साफ साफ न्यायपालिका के बिक जाने की बात लिखी।  पीड़िता जो आज जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है,  इस खत में लिखती हैं ,
”7 जुलाई 2019 को सुबह लगभग 9 बजे एक कार से अभियुक्त शशि सिंह के पुत्र नवीन सिंह अभियुक्त कुलदीप सिंह के भाई मनोज सिंह व कुन्नू मिश्रा व दो व्यक्ति अज्ञात के साथ मेरे दरवाजे पर आकर कार में बैठ यह धमकी दी कि हम लोगों ने जज खरीदकर कुलदीप सिंह व शशि सिंह की जमानत मंजूर करवा ली है और तुम लोगों को फर्जी मुकदमे में जेल में डालकर सजा कराकर सड़ा देंगे।  .इसका उदाहरण तुम महेश सिंह के मुकदमे में देख चुके हो।  अभी समय है, सुलह कर लो. इस घटना के एक दिन बाद दिनांक 8 जुलाई को दिन में 10 बजे के लगभग शशि सिंह के पति हरिपाल सिंह मेरे घर आये और यह धमकी दी कि उपरोक्त मुकदमे में सुलह लगा दो, नहीं तो पूरे परिवार को फर्जी मुकदमे लगाकर जेल में सड़ा कर मार डालेंगे।”

लेकिन चीफ जस्टिस साहब ने इस मामले में कोई हस्तक्षेप करना उचित नही समझा।

पिछले साल ही 16 साल की पीड़ित लड़की ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास के बाहर न्याय के लिए प्रदर्शन किया था।  आत्मदाह की कोशिश की तब जाकर मीडिया में यह मामला उठा तो जैसे-तैसे केस दर्ज किया गया था।

यानी इस केस में इंसाफ को लेकर पीड़िता जितने प्रयत्न कर सकती थी, वह कर गुजरी। लेकिन नियति आज उसे एक दर्दनाक मौत के दरवाजे तक ले आयी है!

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