केंद्र की मोदी सरकार ने कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गाँधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को दी गई एसपीजी (Special Protection Group) सुरक्षा को हटाने का निर्णय लिया है. बताया गया है कि खुफिया एजेंसियों से प्राप्त इनपुट्स के आधार पर गांधी परिवार की जान को किसी प्रकार का कोई प्रत्यक्ष खतरा मौजूद नहीं है जिसके मद्देनज़र परिवार की सुरक्षा घटाई जा रही है. ज्ञात हो कि इसी वर्ष अगस्त माह में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को प्रदान की गई एसपीजी सुरक्षा भी हटा ली गई थी.

1984 से पहले प्रधानमंत्री आवास की सुरक्षा का जिम्मा दिल्ली पुलिस की एक विशेष यूनिट का हुआ करता था जो डीसीपी के नेतृत्व में काम करती थी. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1985 में गृह मंत्रालय ने प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजामों का प्रावधान करने के उद्देश्य से बीरबल नाथ कमेटी गठित की. इस कमेटी ने एक स्पेशल सुरक्षा इकाई SPU के गठन की सिफारिश की. इसी एसपीयू को बाद में एसपीजी नाम से जाना गया.

1988 में भारत की संसद द्वारा पारित एसपीजी एक्ट, 1988 के तहत इस सुरक्षा बल का गठन किया गया था. प्रारम्भ में पूर्व प्रधानमंत्रियों और उनके परिवारों की सुरक्षा को इसमें शामिल नहीं किया गया था. 1991 में राजीव गांधी की जघन्य हत्या के बाद एक्ट में संशोधन करके सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों और उनके परिवार को पद छोड़ने के 10 साल बाद तक यह सुरक्षा देने का प्रावधान किया गया.

1999 में वाजपेयी सरकार ने एसपीजी का पुनरावलोकन किया और पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव, एचडी देवेगौडा और आइके गुजराल की एसपीजी सुरक्षा हटा दी. इतना ही नहीं वाजपेयी सरकार ने 2003 में पूर्व प्रधानमंत्रियों के लिए पद छोड़ने के 10 साल बाद तक सुरक्षा के प्रावधान को घटाकर एक साल कर दिया जिसे प्रतिवर्ष रीव्यू के बाद यदि आवश्यक हो तो बढाया जा सकता है. मजे की बात यह है कि 2004 में प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद वाजपेयी मृत्युपर्यन्त एसपीजी सुरक्षा में रहे. कांग्रेस नीत यूपीए सरकार ने सदाशयता दिखाते हुए उनकी सुरक्षा नहीं घटाई जबकि संशोधित कानून के तहत उनकी एसपीजी सुरक्षा हटाई जा सकती थी.

एसपीजी का प्रमुख आईजी रैंक का पुलिस अफसर होता है जिसे डायरेक्टर का पदनाम दिया गया है. ‘ब्लू बुक’ में प्रधानमंत्री की सुरक्षा से सम्बन्धित सभी नियमों को सूचीबद्ध किया गया है.

पूर्व प्रधानमन्त्री और उनके परिवार को पद छोड़ने के बाद एक वर्ष तक एसपीजी सुरक्षा कवर प्रदान किया जाता है. खतरे की गम्भीरता का प्रतिवर्ष आकलन किया जाता है. यह सरकार के विवेक पर निर्भर करता है.

भूतपूर्व प्रधानमन्त्री चाहे तो यह कवर लौटा सकता है. पूर्व प्रधानमंत्री का परिवार या परिवार का कोई सदस्य चाहे तो इससे इनकार कर सकता है. परन्तु यदि पूर्व प्रधानमंत्री सुरक्षा लौटाते हैं तो उनके परिवार की सुरक्षा स्वत: समाप्त हो जाती है. 2014 में मनमोहन सिंह की पुत्रियों ने स्वेच्छा से यह सुरक्षा लेने से इनकार कर दिया था.

भारत के राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति की सुरक्षा ‘प्रेजीडेंट बॉडीगार्ड्स‘ करते हैं.

भारतीय कानून के तहत महत्वपूर्ण पदों पर आसीन व्यक्तियों और नामी गिरामी हस्तियों, जिनको जान की सुरक्षा का खतरा हो, को सरकार की ओर से विशेष सुरक्षा कवर प्रदान किया जाता है. मुख्यत: सरकार की तीन एजेंसियां यह सुरक्षा प्रदान करती है- एसपीजी SPG, एनएसजी NSG और सीआरपीएफ CRPF.

सुरक्षा की गंभीरता  का स्तर कैसे निश्चित किया जाता है

ख़ुफ़िया विभाग, आईबी IB और रॉ R&W, से प्राप्त इनपुट्स के आधार पर व्यक्ति की जान को खतरे की गंभीरता का निश्चय केन्द्रीय गृह मंत्रालय  द्वारा किया जाता है और उसी के अनुरूप सुरक्षा प्रदान की जाती है. कई बार राज्य सरकार की सिफारिश पर भी सुरक्षा कवर प्रदान किया जाता है

सुरक्षा की श्रेणियां

  • एसपीजी SPG
  • ज़ेड प्लस Z Plus
  • ज़ेड
  • वाई प्लस Y Plus
  • वाई Y
  • 6- एक्स X

एसपीजी– यह आधुनिकतम एवं पेशेवर सशस्त्र सुरक्षा सेना है जो वर्तमान में भारत के प्रधानमंत्री और उनके परिवार को देश के भीतर और बाहर 24 घंटे सघन सुरक्षा प्रदान करती है. हर वक़्त छाया की तरह प्रधानमंत्री के साथ रहते हैं. इसमें  3000  विशेष तौर पर प्रशिक्षित कमांडो हर समय मौजूद रहते हैं. प्रत्येक कमांडो मार्शल आर्ट और बिना शस्त्र संघर्ष करने में दक्ष होता है.

एसपीजी के जवान प्रधानमंत्री के आवास, विमान, वाहनों की सुरक्षा एवं सघन जांच करते हैं. देश के किसी भी हिस्से, विदेश दौरों पर हर क्षण प्रधानमंत्री की सुरक्षा का जिम्मा एसपीजी का होता है. ये आधुनिकतम हथियारों, संचार और सुरक्षा उपकरणों से लैस होते हैं.

सुरक्षा प्राप्त वीवीआइपी के गंतव्य पर 24-48 घंटे या इससे पहले भी पहुँच जाते हैं. उस स्थान में सुरक्षा कारणों से किसी भी प्रकार की तब्दीली कर सकते हैं. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों के लिए आवश्यक है कि इन्हें हर प्रकार का सहयोग मुहैया कराएं. ये पाश्चात्य शैली का काले रंग का सूट और काला चश्मा लगाते हैं जिन्हें दूर से पहचाना जा सकता है.

ज़ेड प्लस– सुरक्षा के लिहाज से एसपीजी के बाद  ज़ेड प्लस का नंबर आता है.

इसकी एक इकाई में एनएसजी कमांडो के अतिरिक्त सीआरपीएफ, आईटीबीपी और सामान्य पुलिसकर्मी होते हैं.  हथियारों, संचार व सुरक्षा के आधुनिक उपकरणों से लैस होते हैं. चौबीसों घंटे सुरक्षा प्रदान करते हैं.

वर्तमान में कुल 22 गणमान्य व्यक्तियों को यह सुरक्षा मिली हुई है जिनमें आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल, उद्योगपति मुकेश अम्बानी और उनकी पत्नी नीता अम्बानी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मनमोहन सिंह व उनकी पत्नी प्रमुख हैं.

ज़ेड– यह तीसरे स्तर की सुरक्षा है. इसमें दिल्ली पुलिस अथवा इंडो–तिब्बत बॉर्डर पुलिस ITBP या केन्द्रीय रिजर्व सुरक्षा बल CRPF के सुरक्षाकर्मी होते हैं. बाबा रामदेव को यही सुरक्षा प्राप्त है.

वाई प्लस– यह चौथे दर्जे की सुरक्षा है. इसमें दो पुलिसकर्मी बारी-बारी से सुरक्षा में साथ रहते है. एक निवास स्थान की सुरक्षा करता है. दो प्रायवेट सुरक्षा अधिकारी (PSOs) भी प्रदान किए जाते हैं. इस श्रेणी के अंतर्गत सुरक्षा प्राप्त व्यक्तियों की संख्या काफी बड़ी है

वाई– एक चल और दूसरा अचल सुरक्षाकर्मी रहता है

एक्स– यह सुरक्षा की पांचवी श्रेणी है. इसमें सामन्यतया एक सशस्त्र सुरक्षाकर्मी प्रदान किया जाता है.

एनएसजी– नेशनल सिक्योरिटी गार्ड एक विशेष सुरक्षा यूनिट है जिसका गठन आतंकवाद से लड़ने के लिए किया गया था. इन्हें आम भाषा में ब्लैक कैट कमांडो भी कहा जाता है. ऐसा इसलिए कि उनकी वर्दी का रंग काला होता है और उस पर काली बिल्ली का चिन्ह लगा रहता है.

CRPF- यह भारत का सबसे बड़ा केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल है जो गृह मंत्रालय के अधीन काम करता है. इसका मुख्य काम केंद्र शासित प्रदेशों और राज्यों में उग्रवाद से लड़ने और कानून व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस की मदद करना है

इंडो–तिब्बत बॉर्डर पुलिस ITBP भारत के पांच केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में से एक है. इसकी स्थापना 1962 में की गई थी. यह देश की चीन से लगती हुई सीमा की रक्षा करते हैं.

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