लोकसभा चुनाव की गहमागहमी में डूबी देश की हिंदी पट्टी में शायद बहुत कम लोगों को जानकारी होगी कि रोहित वेमुला के दोस्त विजयकुमार पेडापुडी भी आंध्र प्रदेश की परचूर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे हैं।

ज्ञात हो कि विजयकुमार उन पांच छात्रों में से एक हैं जिन्हें रोहित वेमुला के साथ हैदराबाद यूनिवर्सिटी हॉस्टल से प्रताड़ित करके निष्कासित कर दिया गया था।

रोहित वेमुला हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के पीएचडी स्कॉलर थे. उनको और उनके चार साथियों को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं से झड़प के बाद तमाम तरीके से परेशान किया जा रहा था, उन्हें हॉस्टल से निकाल दिया गया. वे सड़कों पर सो रहे थे।

उन्हें यूनिवर्सिटी से निकालने की तैयारी चल रही थी। इसे लेकर देश के कई विश्वविद्यालयों में बैठकें हो रही थीं। इस बीच 17 जनवरी 2016 को रोहित वेमुला ने आत्महत्या कर ली थी। इसे छात्रों ने आरएसएस द्वारा की गई सांस्थानिक हत्या माना, क्योंकि हैदराबाद मामले से दो केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय और स्मृति ईरानी तथा आरएसएस के नेता सीधे जुड़े थे।

स्मृति ईरानी उस समय मानव संसाधन विकास यानी शिक्षा मंत्री थीं और उन्होंने लोकसभा में अपने बचाव में मूर्खतापूर्ण दलील पेश की थी कि जिस रोहित वेमुला को दलित बताया जा रहा है वह दलित नहीं बल्कि पिछडी जाति का था।

विजय उस समय पीएचडी छात्र के तौर पर अध्ययनरत थे और हाल ही में अपना शोधपत्र दाखिल किया है। रोहित वेमुला की तरह ही दलित समुदाय से आने वाले विजय कुमार चाहते तो किसी भी आरक्षित सीट से चुनाव लड़ सकते थे मगर उन्होंने जानबूझकर परचूर की अनारक्षित सीट का चुनाव किया ताकि जातिभेद की अभेद्य दीवार को तोड़ा जा सके।

नामांकन पत्र के अनुसार ‘जीरो चल–अचल सम्पत्ति के मालिक‘ विजय का मुकाबला राजनीति के महाबलियों और धनबलियों से हैं। विजय कुमार के संघर्ष को समर्थन देने के लिए क्राउड फंडिंग जारी है। तेलुगु अभिनेता–नेता पवन कल्याण का समर्थन उनके साथ है और वह उनकी पार्टी जनसेना-बीएसपी-लेफ्ट पार्टियों के साझा उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे हैं।

संघर्षो की आंच में तपे हुए ऐसे युवाओं का देश की राजनीति में तहेदिल से स्वागत किया जाना चाहिए।

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