शिरोमणि अकाली दल की सांसद और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल को वॉलमार्ट के सीईओ का  ट्विटर पर बधाई संदेश  मिला तो आरएसएस का  संगठन स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) नाराज़ हो गया। वॉलमार्ट की ओर से बधाई तो बनती ही थी क्योंकि हरसिमरत ने मंत्रिमंडल में रहते फ़ूड प्रोसेसिंग सेक्टर में वॉलमार्ट के लिए एफडीआई का रास्ता आसान किया। वॉलमार्ट ने फ्लिपकार्ट को खरीद लिया है और उसी के जरिये फ़ूड रिटेल में उतरने वाली है क्योंकि भारत के रिटेल सेक्टर में एफडीआई की मंजूरी नहीं है।  फ़ूड रिटेल में सौ प्रतिशत एफडीआई की मंजूरी है।  देश के ४२ लाख करोड़ रूपये के खुदरा  व्यापार में सात करोड़ व्यापारी लगे हैं। इस पर कब्ज़ा ज़माने के लिए वॉलमार्ट, अमेजन और पेटीएम में युद्ध चल रहा है।  अब अम्बानी की रिलायंस भी मैदान में कूद रही है।  मोदी सरकार इस खेल को चलाने के लिए कृत संकल्प है।

बादल परिवार की वंशवादी परम्परा से आने वाली बठिंडा से शिरोमणि अकाली दल की सांसद और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल को वॉलमार्ट के सीईओ ने ट्विटर पर बधाई संदेश दिया  है।  इस बात से आरएसएस का  संगठन स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) बहुत नाराज है।

एसजेएम नेता डॉ अश्वनी महाजन ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा है कि चुनाव में जीत के बाद उन्हें पीएम मोदी की तरफ से बधाई संदेश नहीं मिले बल्कि वॉलमार्ट के सीईओ की तरफ से बधाई मिली। इससे  साफ है कि उनके वॉलमार्ट के साथ खास तरह के रिश्ते हैं। निश्चित तौर पर इसकी जांच की जानी चाहिए। 

डॉ महाजन आरोप लगाया कि बादल सरकार ने सबसे पहले पंजाब में वॉलमार्ट के स्टोर को खोलने की अनुमति दी थी।  इसके बाद जब हरसिमरत मोदी सरकार में मंत्री बनीं तो उन्होंने फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में वॉलमार्ट के लिए एफडीआई का रास्ता आसान किया।

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि वॉलमार्ट समर्थित फ्लिपकार्ट ‘फूड रिटेल’ बिजनस में उतरने जा रहा है, जहां 100 फीसदी एफडीआई को मंजूरी है।

ऑनलाइन के बढ़ते व्यापार से पहले से ही चिंतामें डूबे  खुदरा एवं थोक व्यापारी अमेरिकी दिग्गज वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट द्वारा खाने पीने के सामान की दुकाने खोलने की खबर से सकते में आ गए हैं। विदेशी निवेशकों को भारत में रिटेल सेक्टर के लिए मंजूरी नहीं है, इसलिए फ्लिपकार्ट ‘फूड रिटेल’ बिजनस में उतरने जा रहा है।  इसमें  100 फीसदी एफडीआई को मंजूरी है और फिजिकल स्टोर की स्वीकृति भी।

दरअसल इन कंपनियों का सारा जोर सालाना 42 लाख करोड़ से अधिक के खुदरा बाज़ार ओर लगभग 7 करोड़ देसी रिटेल व्यापारियों के व्यापार पर कब्जा जमाने पर है।

इस खेल में तीन चार बड़ी कम्पनियों के बीच मे प्रतियोगिता चल रही है।  पहली है अमेरिका की वॉलमार्ट जिसने बहुत सोच समझ कर फ्लिपकार्ट को पिछले साल बहुत ज्यादा कीमत देकर खरीदा है।  दूसरी कम्पनी है अमेजन जिसने बहुत तेजी के साथ भारत के बड़े ऑनलाईन मार्केट पर कब्जा कर लिया है.  तीसरी कंपनी है अलीबाबा जो पेटीएम वॉलेट, बैंक और पेटीएम मॉल के जरिए ऑनलाइन मार्केट बहुत महत्वपूर्ण जगह बना चुकी है।

चौथी ओर सबसे महत्वपूर्ण कम्पनी का मैदान में आना अभी बाकी है।  ये है मुकेश अंबानी की रिलायंस जो तेजी से ऑनलाइन ऑफलाइन प्लेटफॉर्म पर आने वाली है जिसे सबसे बड़ा फायदा जियो के कस्टमर बेस का मिलने वाला है।

इस खेल में तेजी के साथ रिलायंस आगे बढ़ रही है।  लेकिन कंपनी चाहे देसी हो या विदेशी. इसका असर तो सात करोड़ छोटे बड़े रिटेल व्यापारियों को ही झेलना पड़ेगा।  चाकू चाहे चाहे देशी हो या विदेशी ..चाकू चाहे खरबूजे पर गिरे या खरबूजा चाकू पर…कटना तो तरबूज को ही है।  ओर यकीन मानिए नयी मोदी सरकार इस खेल के लिए कृत संकल्प है।

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