मोदी सरकार उस राकेश अस्थाना को क्यों बचाना चाहती है जिसके ख़िलाफ स्टर्लिंग बायोटेक मामले में खुद सीबीआई ने एक एफआईआर दर्ज की है।  इसमें  ओवर इनवॉइसिंग के जरिये 4,000 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिग हुई है।  इस मामले में कथित रूप से कांग्रेस के अहमद पटेल के दामाद का नाम भी है।  इस जांच में डायरी बरामद हुई है जिसमे कई जगह राकेश अस्थाना, जो उस समय सूरत पुलिस कमिश्नर थे, का नाम भी आया है कि उन्हें कई करोड़ रुपये दिए गए।

कल ही मोदी सरकार ने राकेश अस्थाना के खिलाफ जांच की निगरानी करने वाले अफसर तरुण गौबा का तबादला कर दिया है।  बुधवार को सीबीआई ने इसे लेकर एक आदेश जारी किया।  इस आदेश में कहा गया है कि कैबिनेट की नियुक्ति समिति तरुण गौबा को समय से पहले ही उनके राज्य कैडर में वापस भेजने को मंजूरी देती है।

कुछ दिन पहले सीबीआई के एडिशनल डायरेक्टर एम. नागेश्वर राव को मोदी सरकार ने हटा दिया और उन्हें फायर सर्विसेज, सिविल डिफेंस एंड होम गार्ड के डायरेक्टर पद पर ज्वाइन करने का आदेश दे दिया।  सीबीआई के पूर्व अतिरिक्त निदेशक एम नागेश्वर राव ने अस्थाना के खिलाफ जांच की निगरानी के लिए तरुण गौबा को नियुक्त किया था।

तरुण गौबा गुजरात की फार्मा कंपनी स्टर्लिंग बायोटेक लिमिटेड के निदेशक संदेसरा बंधुओं और राकेश अस्थाना के सबंन्धो की ही तो जांच कर रहे थे जिसमे अभी कुछ दिन पहले ही पता चला है कि स्टर्लिंग बायोटेक ने पीएनबी घोटाले से भी ज्यादा की रकम की चपत लगाई है।  आखिर क्यों मोदी सरकार इस जांच को होने नहीं देना चाह रही है यह समझ के बाहर की बात है?

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