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पिछले पांच सालों में साम्प्रदायिक राजनीति के फसल के लिए गाय एक उर्वरक के रूप इस्तेमाल की जाती रही है और चूंकि चुनाव हैं इसलिए अब बीजेपी इस फ़सल के दाम भुनाने को तैयार बैठी हुई है।  .इसलिए इस मुद्दे की पड़ताल बेहद जरूरी है।  इस लेख को यदि आप आखिर तक पढ़ेंगे तो मोदी जी की कथनी और करनी के फर्क को जान कर आप आश्चर्य से भर जाएंगे।
चलिए, 2014 की शुरुआत प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार मोदीजी के एक बेहद भावुक भाषण से ही करते हैं।  ‘किन चीजों के लिए गर्व किया जा रहा है भाइयो और बहनों ! आपका कलेजा रो रहा या नहीं, मुझे मालूम नहीं।   मेरा कलेजा चीख-चीख कर पुकार रहा है। और आप कैसे चुप हैं, कैसे सह रहे हैं, मैं समझ नहीं पा रहा हूं। ”
जी हाँ , मोदीं जी गोवंश के मांस यानि बीफ एक्सपोर्ट की बात कर रहे हैं।  ‘दिल्ली में बैठी हुई सरकार का सपना है कि हम हिंदुस्तान में पिंक रिवोल्यूशन करेंगे और पूरे विश्व में मांस-मटन का एक्सपोर्ट का बिजनेस करेंगे।  स्वंय, भारत  सरकार ने इस वर्ष घोषित किया है कि  पूरे विश्व में बीफ एक्सपोर्ट में हिंदुस्तान नंबर वन है।  किन चीजों के लिए गर्व किया जा रहा है।  भाइयो और बहनों, आपका कलेजा रो रहा या नहीं?
अपने भाषण के एक साल बाद, मोदी 2014 में जीत गए हैं।  अब 2015 आ गया है। आश्चर्यजनक रूप से, 2015 में भी भारत बीफ एक्सपोर्ट में नंबर वन बना रहता है।
लेकिन केंद्र में भाजपा सरकार के बनने के बाद से देश भर में गाय, गोमांस और मांसाहार को लेकर घमासान मच जाता है।  कई लोगों को गोमांस का सेवन करने, लाने, ले जाने या गाय को काटने के लिए ले जाने के शक में पीट पीट कर मार दिया गया।  मोब लिंचिंग की दर्जनों घटनाओं में सेकड़ो लोग घायल होते है या मार दिए जाते है, पर बीफ एक्सपोर्ट बदस्तूर जारी है।
राज्यों में भाजपा की सरकार बनते ही छोटे छोटे बूचड़खानों पर पाबंदी लगा दी जाती है पर पैक्ड बीफ हमेशा अवलेबल रहता है।
2014 -15 में बीफ एक्सपोर्ट बिलकुल टॉप पर है।   अगले तीन सालो 2015 -16 , 2016-17 , 2017 -18 में यह मात्रा मामूली सी ही कम होती है।  यह वो साल थे जब गाय को लेकर मोब लिंचिंग की घटनाए बहुत बढ़ गयी थी, पर बीफ एक्स्पपोर्ट बदस्तूर जारी रहता है। कोई रोक नहीं लगाई जाती।
2018 में जरूर गिरावट आती है। . दरअसल सालो से भारतीय बीफ के कुल बीफ निर्यात का आधे से अधिक का हिस्सा अकेले वियतनाम को जाता है। लेकिन वह इसे खुद नहीं रखता।  वियतनाम से भारत के बीफ शिपमेंट का ज्यादातर हिस्सा ग्रे मार्केट के माध्यम से चीन को जाता है।  चीन आधिकारिक तौर पर भारतीय गोमांस के आयात की इजाजत नहीं देता है क्योंकि उसे यह आशंका है कि यह पैर और मुंह के रोग वायरस  (एफएमडीवी) से दूषित हो सकता है।   इसलिए यह वियतनाम के रास्ते जाता है। .  दरअसल , इसके पीछे एक अच्छी तरह से स्थापित सिंडिकेट काम करता है।
2018 में वियतनाम को गोमांस की आपूर्ति में 32 प्रतिशत की वार्षिक गिरावट आ जाती है। .इसके दो कारण है- वियतनाम की घरेलू समस्याए और अंतरराष्ट्रीय बाजार कुछ समय से अस्थिर हो जाना। .. इस  आपूर्ति घटने का प्रभाव यह हुआ कि भारतीय बीफ की कीमत में काफी कमी आ जाती है।
पिछले दिनों न्यूज़ पेपर्स में अंतराष्ट्रीय संस्था एचआरडब्ल्यू की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया कि मोदी राज में बीफ निर्यात में कमी आयी है।  लेकिन ध्यान देने लायक बात यह है की एचआरडब्ल्यू की रिपोर्ट सिर्फ बीफ निर्यात के मूल्य के डेटा पर आधारित है, मात्रा यानी क्वान्टिटी पर नहीं।
एग्री-एक्सपोर्ट प्रमोशन बॉडी ‘एपीडा’ के आंकड़े यह बताते है कि भले ही 2014 से पहले भारतीय बीफ निर्यात में वृद्धि गति बरकरार नहीं रह सकी हो, लेकिन निर्यात का स्तर मोटे तौर पर स्थिर ही रहा है।  कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकार (एपिडा) ने कहा कि वर्ष 2018-19 की अप्रैल-फरवरी अवधि के दौरान 22,925 करोड़ रुपये के 11.1 लाख टन बीफ का निर्यात किया गया जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में 23,800 करोड़ रुपये मूल्य के 12.3 लाख टन बीफ का निर्यात का हुआ था।
यह है हकीकत कि मोदी जी की कथनी और करनी की, बीफ का एक्सपोर्ट बिलकुल बढ़िया तरीके से चल रहा है तो  लेख के अंत में एक बार फिर २०१४ के मोदी जी के भाषण को याद करेंगे और विशेषकर धर्मप्रेमी धर्मरक्षक हिन्दू ,जैन भाईयो से जरूर पूछेंगे। भाइयो और बहनों, आपका कलेजा रो रहा या नहीं मुझे मालूम नहीं ! मेरा कलेजा चीख-चीख कर पुकार रहा है. और आप कैसे चुप हैं, कैसे सह रहे हैं   … .मैं समझ नहीं पा रहा हूं। ”

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