सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई के खिलाफ एक पूर्व कर्मचारी की ओर से यौन शोषण की शिकायत के बाद उठे विवाद ने भारतीय जनता पार्टी को इस संस्था के राजनीतिकरण का मौका दे दिया। मामले के प्रकाश में आने के बाद जस्टिस गोगोई ने विशेष बेंच का गठन किया और इसकी सुनवाई में सरकार के दोनों वकील एटार्नी जनरल और सालिसिटर जनरल ने उनका पक्ष लिया और उनकी इस राय का पूरा समर्थन किया कि शिकायत एक बड़ी साजिश का हिस्सा है और न्यायापालिका आजादी खतरे में है। वित्त मंत्री अरूण जेटली ने मौका देखते ही एक ब्लाग लिख मारा। उन्होंने यह घोषणा कर दी कि न्यायपालिका पर यह खतरा किस ओर है। उन्होंने इसे उग्र-वामपंथियों की ओर से पैदा किया गया बता दिया जिसे कांग्रेस से जुड़े लोगों का समर्थन मिला हुआ है। उन्होेंने यह राय भी व्यक्त कर डाली कि इन लोगों को जनता में समर्थन नहीं है, लेकिन उन्हें मीडिया और शिक्षण संस्थानों में उनकी लोकप्रियता से ज्यादा प्रतिनिधित्व मिला हुआ है।
सबसे दिलचस्प बात जेटली ने यौन उत्पीड़न की शिकायत की सुनवाई के बारे में कही है। उनका कहना है कि वैसे तो यह शिकायत इस तरह के मामलों के लिए बनी कोर्ट की अंदरूनी समिति के पास जाती हैं। लेकिन शिकायत कर कापी जजों और मीडिया के बीच बांटी गई है, इसलिए यह सामान्य नहीं रह गई है। वित्त मंत्री के मुताबिक इसे कोर्ट के विवेक पर छोड़ देना चाहिए कि इसकी सुनवाई किस तरह करती है। उनकी राय में अगर इन मामलों में कठोरता के साथ पेश नहीं आया गया तो ऐसी घटनाएं तेज हो जाएंगीं।
लेकिन मामले के प्रकाश में आते ही इसका खुद संज्ञान लेकर एक विशेष बेंच का गठन और उसमें खुद भाग लेने और शिकायतकर्ता को सुने बगैर फैसला देने और मीडिया को भी विवेक से काम लेेने की सलाह देने के कदम को वकीलों और बुद्धिजीवियों ने कानून प्रक्रिया का उल्लंघन बताया है। इसे सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट और बार एसोसिएशन ने भी निंद की है। उन्होंने पूरे कोर्ट की ओर से एक जांच कमेटी बनाने की मांग की है।
एक अन्य बयान में अरूणा राय, अरूधंति राय, मेधा पाटकर, योगेंद्र यादव, आकार पटेल समेत कई लोगों ने निष्पक्ष जांच के लिए एक महिला की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज और जाने-माने लोगों की एक कमेटी बनाने की मांग की है। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश से प्रशासनिक मामलों से अलग रहने की मांग की गई है ताकि उन लोगों पर दबाव नहीं डाला जा सके जिसके नाम का उल्लेख महिला ने अपनी शिकायत में की है।
वित्त मंत्री जेटली ही नहीं, पूरी सरकार सुप्रीम कोर्ट के राजनीतिकरण में लगी है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई के खिलाफ हुई यौन उत्पीड़न की शिकायत पर विशेष बेंच की सुनवाई को लेकर उठे विवाद ने उसे इसका मौका दे दिया है। नौकरशाही, आरबीआई चुनाव आयोग और सेना के बाद वह सुप्रीम कोर्ट के राजनीतिक इस्तेमाल में लग गई है।
गौरतलब है कि मामले पर सबसे शुरू में प्रतिक्रिया देने वालों में प्रसिद्ध वकील प्रशांत भूषण ने विशेष बेंच के जरिए मामले की सुनवाई को कानून का उल्लंघन और शक्ति का दुरूपयोग बताया था और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की । उन्होंने अपने मामले की खुद सुनवाई करने को ‘कंगारू कोर्ट’ का नाम दिया। महिला वकीलें भी शिकायत करने वाली महिला के साथ खड़ी हो गई हैं।

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