आज जवहरलाल नेहरू का जन्मदिन है। वह कांग्रेस के अकेले ऐसे नेता हैं जिनके वजूद को नकारने में संघ परिवार वर्षों से लगा है। यह कोशिश एकदम निचले स्तर की रही है और इसमें प्रधानमंत्री मोदी खुद शामिल हैं। संघ परिवार खुद उनसे लड़ नहीं सकता तो वह उन्हें अपने समकालीनों से भिड़ाता है। कभी उन्हें सरदार पटेल से तो कभी नेताजी सुभाषचंद्र बोस से भिड़ाया जाता है। लेकिन मुश्किल यह है कि न तो पटेल और न ही नेताजी उनसे लड़ने के लिए तैयार होते हैं। हर बार नेहरू बिना चोट के निकल जाते हैं। यह समझना दिलचस्प है कि एक भावक, ईमानदार और सच्चे देशभक्त को लोगों के मन से निकालने और खलनायक बनाने में लगे लोग अपनी मुहिम में क्यों नही सफल हो पाते हैं।
असल में नेहरू जनता के राजकुमार थे। लोगों के मन में उनकी छवि एक रोमांटिक नायक की थी जो सर्वशक्तिमान अंग्रेजों से मुकाबला कर सकता था। जब मैं बचपन में सुनी हुई कहानियों पर गौर करता हूं तो लोकस्मुति में उनकी नायक वाली यह तस्वीर साफ होकर उभरती है। ऐसे ही एक किस्से मेंं बताया जाता था कि जब वह लंदन में पढते थे तो उनके कपड़े पेरिस से धुल कर आते थे।
सबसे रोमांटिक किस्सा एक कल्पित प्रेम का है जिसकी नायिका ब्रिटेन की राजकुमारी है। इसमें बताया जाता है कि उनके साथ पढती थी। कहानी में बंबईया फिल्मों की तरह शोख राजकुमारी लड़कों पर रोब जमाने के लिए कैंब्रिज के हर गेट पर एक कार रखवाती है और मनचाहे गेट से निकल कर चली जाती है। कहानी में नेहरू भी हर गेट पर कार रखवाते हैं और जिस गेट से राजकुमारी निकलती है, वह भी उसीसे निकलते हैं। मुझे अगर ठीक-ठीक याद है तो नेहरू उसका चुंबन भी लेते हैं। जाहिर है कि यह कहानी अपनी बनावट में एकदम भदेस है। लेकिन जब कहानी के परतो को उघाडते हैंं तो इससे गुलाम भारत के विद्रोह की वह नैरेटिव सामने उभर आती है जिसके नायक नेहरू हैं। यह कहना जरूरी नहीं है कि यहां राजकुमारी ब्रिटिश सत्ता की प्रतीक हैं।
हो सकता है कि यह कहानी लार्ड माउंटबेटन की पत्नी एडविना के साथ नेहरू की नजदीकियों से प्रभावित होकर गढी गई हो। एडविना से नेहरू का संबंध किसी तरह के अपराध-भाव से ग्रस्त या नहीं था और इसमें दुनिया से छिपाने के लायक कुछ नहीं था। यह काफी हद तक सार्वजनिक भी है। दोनों के बीच के पत्र-व्यवहार भी दोनों के परिवार वालों ने आापस में साझा कर रखा है। एडविना के परिवार वालों से बातचीत का हवाला देकर प्रसिद्ध पत्रकार कुलदीप नैय्यर ने लिखा है कि उसके परिवार वाले इसे एक आध्यात्मिक प्रेम मानते हैं।
एडविना से उनके रिश्ते को लेकर संघ परिवार नेहरू को निशाना बनाते हैं और उसे ऐय्याशी के रूप में पेश करते हैं। नेहरू के खिलाफ युद्ध में इसे वह सबसे बड़ा हथियार बनाते हैं।
अंग्रेजी सत्ता से युद्ध के नायक की नेहरू की छवि और अपने जीवन काल में ही मिथक बन जाने के खिलाफ डा लोहिया ने भी मुहिम चलाई थी क्योंकि देश के बंटवारे को रोकने में कांग्रेस नेताओं की विफलता और आजाद भारत में नेहरू की नीतियों से वह नाराज थे। डा लोहिया व्यक्तिगत रूप से उनसे प्रभावित थे और उनकी कोशिश एक मोहक व्यक्तित्व के असर से बाहर निकलने की थी। इसलिए एक बार उन्होने अपने चेलों से कहा भी कि उन्हें मालूम है कि अगर वह बीमार हों तो उनकी सबसे अच्छी देखभाल नेहरू के घर में ही हो सकती है।
इसके विपरीत संघ परिवार नेहरू को एक छिछोरा और देशद्रोही बताना चाहता है क्योंकि ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ युद्ध के नायक को लोगों की स्मृतियों से मिटाना उसकी राजनीतिक मजबूरी है। इसका सबसे खराब पहलू यह है कि वह इसके लिए झूठ का सहारा ले रहा है। यह युद्ध अभी जारी रहेगा। इस युद्ध में हम नेहरू के साथ खड़े हैं और इस नायक का वंदन करते हैं।

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