देश में विकास की अवधारणा को लेकर सालों से देशभर में बहती नदियो के प्रवाह को रोककर बांध बनाकर नहरो के द्वारा सिंचाई करने और बिजली उत्पादन के द्वारा उर्जा पूर्ति करने के सरकार के फैसले और विभिन्न परियोजनाओ के निर्माणाधीन होना व कई परियोजनाओ का कार्य जारी रहना इस बात को बताता है कि विकास की अवधारणा को लेकर चलने वाले शायद इस बात से अनभिज्ञ है कि विकास कि अवधारणा विनाश की नीव पर तैयार की गई हे|

देशभर में नदियो पर बनने वाली बांध और नहर परियोजनाओ के परिणाम आम लोगो के लिए कभी सुखद नही रहे है, इन परियोजनाओ से जो लाभ हुआ है, उससे अधिक नुकसानी भी है। ताजा उदाहरण सरदार सरोवर परियोजना में देखने को मिल रहा है, यह परियोजना नर्मदा नदी पर बनी हुई देश कि विशालतम बांध परियोजनाओ में से एक है। विगत 10 सालो में इस परियोजना के कारण नर्मदा नदी का प्रवाह थम गया है और पानी रूकने के दुष्परिणाम सामने दिखाई देने लगे है, मानसून सत्र के पहले लगभग 8 माह तक नर्मदा नदी का पानी कुछ स्थानो पर प्रदुषित दिखाई पडता है और इसके आस पास के ग्रामवासी इस बारे में बताते भी है।

मध्य प्रदेश के निमाड क्षैत्र के बडवानी, धार व आलीराजपुर जिले में लगभग 100 कि.मी. का प्रवाह करती हुई नर्मदा नदी आगे बढती है, और इन 100 कि.मी. के बीच कई स्थान ऐसे है जहां पर नदी का पानी प्रदुषित दिखाई पडता है। वही कई स्थानों पर आस्था रखने वाले श्रद्धालु नर्मदा नदी के जल से आचमन करने से भी घबराते है।

दूसरी और मानसून के दौरान जब अन्य बांधो का पानी छोडा जाता है तब नर्मदा नदी अपने पूरे उफान पर रहती है और इसका जलस्तर कई गुना बढ जाता है, ऐसे में नर्मदा किनारे के कई किसानो के खेत और फसलें प्रभावित होती है। वर्तमान मानसून सत्र के दौरान इसका उदाहरण देखने को मिल रहां है, जब कई किसानों की फसलें खेत में पानी भर जाने के कारण प्रभावित हुई और किसानो को नुकसानी उठानी पडेगी, वही धार जिले के ग्राम निसरपुर की बस्तियों में पानी भरने के कारण नाव चलने लगी है।

इसके अलावा सबसे बडा प्रत्यक्ष खतरा सामने आने लगा है, सालो से नर्मदा नदी के किनारे वाले गांवो में बालू रेत खनन का वैध और अवैध कारोबार जारी है, नर्मदा नदी के किनारे वाले कई ग्रामो में इन रेत खदानों की गइराई कई फूट गहरी है, इन खदानो में बरसात के पहले भी नर्मदा नदी को पानी आ जाता है और मोटर पम्पों द्वारा इन गड्ढों को खाली कर रेत खनन जारी रहता है। वहीं मानसून सत्र में रेत खदाने तालाबो में परिवर्तित दिखाई देने लगी है जो कि आने वाले समय के लिये सुखद संकेत नहीं है।

इन्ही खदानो के माध्यम से नर्मदा नदी का पानी धीरे धीरे आगे बढेगा और जमीन का दलदलीकरण प्रारम्भ हो जायेगा, इसका असर जल्दी दिखाई नहीं देगा लेकिन जब परिणाम सामने आयेगें तब तक बहुत देर हो जायेगी।

सन 2019 के पहले तक नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध को उसकी उंचाई के अनुसार भरा नही गया था, अभी तक जो जानकारी मिल रही है उसके अनुसार सरदार सरोवर बांध को 138 मीटर तक भरा जायेगा, याने डूब का मंजर ज्यादा भयावह होगा और प्रभावितो की संख्या भी अधिक होगी और आम लोगो का संघर्ष व सरकारी दमन का नया दौर प्रारंभ होगा |

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