गोपाल कांडा की कहानी हर चैंनल पर जोर-शोर से चली और लोगों का ध्यान बंट गया। इस कथा का सार यही था कि बीजेपी एक शर्म और हया वाली पार्टी है।  लोगों ने ऊँगली उठायी और उसने कांडा का समर्थन   नहीं लिया। खबर सूत्रों के हवाले से थी। असलियत यह है कि अब उसके समर्थन की जरूरत नहीं है।   कांडा को हवाई जहाज में लेकर दिल्ली आयी भाजपा सांसद सुनीता दुग्गल ने जो खबर दी उसका पीछा किसी ने नहीं किया कि वह निर्दलीय विधायकों को लेकर आयी और आलाकमान उनसे बातचीत कर रहा है।  क्या बातचीत कर रहा है, यह दुग्गल को नहीं मालूम।  निर्दलीय विधायक आलाकमान यानि अमित शाह से क्या विचारधारा और राजनीतिमें नैतिकता बचाने की बातचीत कर रहे थे?  क्या धारा ३७० पर जनमत तैयार करने के उपयों पर चर्चा कर रहे थे क्योंकि  इसे समझाने में प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष जरूर चूक  गए नहीं तो हरियाणा में बहुमत से पीछे नहीं रहते? जाहिर है सौदेबाजी चल रही थी।  चैनलों को घोषणा के पहले तक यह भी पता नहीं था कि दुष्यंत चौटाला से कौन बातचीत कर रहा है और क्या सौदेबाजी हो रही है।  सबसे दिलचस्प घोषणा अमित शाह ने की-लोगों के  जनादेश का सम्मान करते हुए बीजेपी ने दुष्यंत की पार्टी से गठबंधन किया है।  हरियाणा का जनादेश था कि बहुमत नहीं मिले तो विपक्ष की किसी पार्टी को पकड़ लाओ और कुर्सी को हाथ से जाने न दो?  जनादेश को इतना अच्छी तरह कौन समझता है? प्रधानमंत्री मोदी ने कल अपने विजय समारोह में कह ही दिया था कि हरियाणा में अभूतपूर्व विजय  मिली है।

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