चुनाव प्रचार की व्यस्तता में जुबान का फिसलना या आवेश मुँह से कुछ गलत निकल जाना स्वाभाविक बात है! लेकिन, इस बार चुनाव में जिस तरह आपत्तिजनक और गैरजिम्मेदार भाषा बोली जा रही है, वो सवाल खड़े करती है! आखिर कोई जिम्मेदार पद पर रहे नेता की चुनावी भाषा इतनी निम्नस्तरीय कैसे हो सकती है? लेकिन, एक बात तो है कि विवादस्पद बयानबाजी में भाजपा के नेताओं का कोई जोड़ नहीं है! छोटे-मोटे नेता ये गलती करें, तो उनकी अनदेखी की जा सकती है! पर, बड़े नेताओं की जुबान भी काबू में नहीं है! इसे बौखलाहट भी नहीं कहा जा सकता! क्योंकि, जिनके मुखारविंद से बोल निकल रहे हैं, वे मुख्यमंत्री और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जैसे जिम्मेदार पदों पर रहे हैं! प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तो छिंदवाड़ा में कलेक्टर को मंच से खुली धमकी दी। एक चुनाव सभा में उन्होंने कहा ‘अरे पिट्ठू कलेक्टर सुन ले, हमारे दिन भी जल्दी आएंगे, तो तब तेरा क्या होगा?’ मामला ये था कि कलेक्टर ने शिवराज सिंह को उमरेठ में शाम 5 बजे के बाद हेलीकॉप्टर उतारने की इजाजत नहीं दी थी! कलेक्टर ने आचार संहिता का पालन करते हुए इजाजत देने से इंकार किया था। इस पर शिवराज सिंह भड़क गए और कलेक्टर को देख लेने की धमकी दी!

भोपाल की लोकसभा सीट इस बार देशभर में प्रोफाइल है! कांग्रेस ने यहाँ पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को टिकट देकर भाजपा का एकाधिकार तोड़ने की कोशिश की है! लेकिन, भाजपा को उनसे मुकाबले के लिए उनकी कद-काठी का कोई नेता नहीं मिला! जिसका भी नाम चला, वो कन्नी काट गया! अंततः भाजपा को साध्वी प्रज्ञा को उम्मीदवार बनाकर उतारना पड़ा! साध्वी ने भोपाल आते ही आग उगलना शुरू करके ये बता दिया कि वे किस तरह का चुनाव लड़ने भोपाल आई हैं! साध्‍वी प्रज्ञा ठाकुर एक के बाद एक विवादस्पद बयान दे रही हैं! उन्होंने सबसे पहले मुंबई हमले में शहीद हुए हेमंत करकरे को लेकर विवादित बयान दिया! उन्होंने कहा था कि मुंबई में हुए 26/11 हमले में शहीद हुए एटीएस चीफ हेमंत करकरे को उनके कर्मों की सजा मिली है! उनके कर्म ठीक नहीं थे, इसलिए उन्हें संन्यासियों का शाप लगा! साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि जिस दिन मैं जेल गई, उसके सवा महीने में ही आतंकियों ने उनका अंत कर दिया!
इसके बाद साध्वी प्रज्ञा ने बाबरी मस्जिद विध्वंस को लेकर भी विवादित बयान दिया। एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि राम मंदिर निश्चित रूप से बनाया जाएगा। यह एक भव्य मंदिर होगा! यह पूछने पर कि क्या वे राम मंदिर बनाने की समयसीमा बता सकती हैं? साध्वी प्रज्ञा ने कहा, ‘हम मंदिर का निर्माण करेंगे! आखिर, ढांचे (बाबरी मस्जिद) को ध्वस्त भी तो हम ही गए थे! साथ में ये भी जोड़ दिया कि ढांचा उन्होंने चढ़कर गिराया था! जबकि, खबरखोजियों का कहना कि 1992 में जब ढांचा गिराया गया, प्रज्ञा ठाकुर की उम्र 4 साल थी! इन सारे बयानों की जमकर आलोचना हुई! वाजपेई सरकार में गृह राज्यमंत्री रहे स्वामी चिन्मयानंद ने भी साध्वी प्रज्ञा के बयान को गलत बताया! कहा कि प्रज्ञा ने पहाड़ जैसी ग़लती की है! उन्होंने दिग्विजय सिंह के ख़िलाफ़ अपने अभियान को बहुत कमज़ोर कर लिया और जनता की सहानुभूति खो दी। साध्वी प्रज्ञा के बयान पर चुनाव आयोग ने भी संज्ञान लिया और उन्हें चुनाव आचार संहिता उल्लंघन का नोटिस थमा दिया।
प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव भी बदजुबानी करने वालों में पीछे नहीं रहे! शिवपुरी में भाजपा उम्मीदवार के नामांकन के दौरान सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को उन्होंने खुलेआम धमकी दी! उन्होंने कहा था कि महीने, दो महीने बाद हम आपको इसी जगह पर मिलेंगे, फिर हम आपको आपकी औकात का ज्ञान कराएंगे। भार्गव ने वहाँ मौजूद भाजपा नेताओं से कहा कि एक-एक का नाम नोट करिए हम चुन-चुनकर उन लोगों को निपटाने का काम करेंगे। राजगढ़ (ब्यावरा) में भी भाजपा की विजय संकल्प यात्रा में पार्टी के पूर्व राज्यमंत्री बद्रीलाल यादव ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को लेकर गलत बयानी की। हलके लहजे में उन्होंने कहा कि इसका जाना तय है! ये या तो अस्पताल जाएगा या दूसरी जगह! राहुल, सोनिया, दिग्विजय और सिंधिया ने कमलनाथ को इतना जहर पिला दिया है कि इसके आंतडे ख़राब हो गए हैं।
गोपाल भार्गव की जुबान फिसली हो, या गलती से एक बार उन्होंने कुछ बोल दिया हो, ऐसा नहीं है! सागर के बामोरा गांव में संयोजक पालक कार्यकर्ता सम्मेलन में भी गोपाल भार्गव ने निम्नस्तर की बात कही थी! उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह की उंगलियों और मुंह में गुप्त रोग है, इसलिए वह देश के खिलाफ बोलते है। जब तक वो मोबाइल पर अपनी उंगलियां नहीं चला लेते, अपने मुंह से कुछ देश के खिलाफ कोई बयान नहीं दे देते, तब तक दिग्विजय सिंह का खाना हजम नहीं होता। इस कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह समेत कई नेता मौजूद थे। सबने उनके बयान पर ठहाके भी लगाए! सवाल यह है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी में ऐसे बयान देकर वे कैसी राजनीति को जन्म देने की कोशिश कर रहे थे।
प्रदेश भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और खंडवा सांसद नंदकुमार सिंह चौहान तो बिगड़े बोल के लिए पुराने विख्यात हैं। वे कब क्या बोल दें, कोई अनुमान नहीं लगा सकता! चुनाव के दौरान वे एक पत्रकार के मोदी विरोधी सवाल पूछने पर भड़क गए। एक पत्रकार ने उनसे पूछ लिया था कि इस बार मोदी लहर कहाँ है? ये सुनकर चौहान उसे पाकिस्तानी पत्रकार बताने से भी नहीं चूके। बोले कि आपने ये खबर पाकिस्तानी रेड़ियो पर सुनी होंगी, जो सवाल आप कर रहे हैं, ये बात किसी पाकिस्तानी न्यूज़ एजेंसी का सवाल होगा? इसके बाद भी नंदकुमार चौहान की जुबान पर लगाम नहीं लगा! एक चुनाव सभा में उन्होंने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि राहुल गाँधी कुछ भी कर सकते हैं! वे एक ऐसी मशीन लाने वाले हैं, जिसमें एक तरफ से आदमी डालेंगे तो दूसरी तरफ से ‘बाई’ (औरत) बाहर आएगी! अपने बड़बोले अंदाज में कहा कि जब राहुल गांधी आलू से सोना बनाने की मशीन बना सकते हैं तो आदमी से औरत बनाने की मशीन भी तैयार कर सकते हैं!
बात सिर्फ भाजपा नेताओं तक ही सीमित नहीं है! कांग्रेस के बड़े नेताओं की जुबान भी फिसल रही है! सिंगरोली में एक सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस उम्मीदवार अजय सिंह ने कहा कि रीति पाठक ने क्षेत्र में विकास का कोई काम नहीं करवाया। 2014 में मोदी लहर थी और उन्होंने सबको 15-15 लाख देने का झूठा वादा किया था। इसलिए अबकी बार ऐसी भूल मत करना ‘ठीक माल नहीं बा!’ इस बयान को लेकर भी उनकी काफी छीछालेदर हुई! उधर, छतरपुर में समाजवादी पार्टी के नेता आरआर बंसल भी पीछे नहीं रहे! एक कार्यक्रम में बंसल ने कार्यकर्ताओं को कहा कि जो वोटर बूथ तक वोट डालने न जाएं, उनकी पर्ची लाकर खुद वोट डाल दें। जब इसका विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो लोगों की कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई! अभी बदजुबानी का दौर ख़त्म नहीं हुआ है! चुनाव तक और भी जुबान से निकले बेकाबू बयान सामने आने वाले हैं!

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