टीम राहुल के नेता भाजपा के संपर्क में

कमाल की बात है कि राहुल गांधी ने सक्रिय राजनीति में आने और फिर कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद जिन नेताओं को प्रश्रय दिया प्रमोट किया उनमें से ज्यादातर नेता इस समय पार्टी में हाशिए पर हैं। जिन नेताओं को लेकर टीम राहुल बनी थी उनमें से कई नेता तो पार्टी छोड कर जा चुके हैं और कई नेता भाजपा के संपर्क में बने हुए हैं। राहुल गांधी के बनवाए बिहार प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी, हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर, झारखंड प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत, पार्टी प्रवक्ता डॉ. अजय कुमार आदि पार्टी छोड चुके हैं। अब उन नेताओं की बारी दिख रही है, जो पीढियों से कांग्रेस में हैं। ऐसे नेताओं में उत्तर प्रदेश से पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, मध्य प्रदेश से पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और महाराष्ट्र से पूर्व सांसद मिलिंद देवडा शामिल हैं। तीनों इन दिनों बागी तेवर के साथ सार्वजनिक तौर पर अपनी ही पार्टी के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। तीनों भाजपा से संपर्क बनाए हुए हैं। तीनों का असंतोष राज्यसभा चुनाव से जुडा हुआ है। हालांकि कहा यह भी जा रहा है कि राज्यसभा में जाने के आकांक्षी इन तीनों नेताओं ने खुद ही अपनी नाराजगी की खबरें चलवा रखी है और यह प्रचार करवा रहे हैं कि वे भाजपा के संपर्क में हैं।

प्रियंका राज्यसभा जाएंगी?

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी अगर राज्यसभा में जाना चाहे तो उन्हें सिर्फ इच्छा जाहिर करनी होगी और पार्टी उनको राज्यसभा में भेजेगी। वैसे भी अगले महीने होने वाले दोवार्षिक चुनावों में कांग्रेस को करीब दस सीटें मिलेंगी। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ में उसे सीटों का फायदा होगा, जबकि बाकी राज्यों में यथास्थिति रहेगी। इसलिए प्रियंका का राज्यसभा जाना कोई बहुत बडी बात नहीं होगी। सवाल यही है कि क्या वे सचमुच राज्यसभा में जाना चाहती हैं? पार्टी के कई नेता इस पक्ष में हैं। उनका कहना है कि जब वे सक्रिय राजनीति में आ पार्टी की महासचिव भी हो गई हैं तो उन्हें अब संसद में भी पहुंच जाना चाहिए। प्रियंका को राज्यसभा में भेजने की मांग मध्य प्रदेश के में मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के समर्थक नेताओं की ओर से उठी है। वे चाहते हैं कि पार्टी मध्य प्रदेश से प्रियंका को राज्यसभा में भेजे। अगर ऐसा होता है तो स्वाभाविक रूप से ज्योतिरादित्य सिंधिया का रास्ता रूक जाएगा। राज्य से कांग्रेस को दो सीटें मिलनी हैं, जिनमें से एक दिग्विजय को फिर से मिलना तय माना जा रहा है। वैसे अगर पार्टी आलाकमान चाहे तो प्रियंका को दूसरे किसी राज्य से भी राज्यसभा में भेजा जा सकता है।

आप का ‘हनुमान प्रयोग’ जारी रहेगा

दिल्ली आम आदमी पार्टी चुनाव जीत कर तीसरी बार सरकार बना लेने के बाद भी हनुमान का राजनीतिक इस्तेमाल छोड नहीं रही है। पार्टी के विधायक और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने ऐलान किया है कि उनके चुनाव क्षेत्र में हर महीने के पहले मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ होगा। इस तरह संभवत: पहली बार किसी राजनीतिक दल या नेता की ओर से सांस्थायिक रूप से हनुमान आराधना का आयोजन किया जाएगा। गौरतलब है कि दिल्ली में चुनाव प्रचार बंद होने से पहले और चुनाव जीतने के बाद अरविंद केजरीवाल भी कनॉट प्लेस में स्थित हनुमान मंदिर मे मत्था टेकने गए थे। चुनाव के दौरान ‘जय श्रीराम बनाम जय हनुमान’ का विमर्श खूब चला था और केजरीवाल ने एक टीवी चैनल पर इंटरव्यू के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ भी किया था। आम आदमी पार्टी अब इस हनुमान विमर्श को दिल्ली मे चलाए रखेगी। यह भी गौरतलब है कि दिल्ली में लोगों के हनुमान मंदिर जाने का चलन बहुत ज्यादा है। मंगलवार और शनिवार को हनुमान मंदिरों में बेमिसाल भीड जुटती। दिल्ली के कई बडे प्रतीकों और पहचान में एक पहचान करोलबाग में स्थित विशाल हनुमान प्रतिमा भी है। सो, केजरीवाल एंड कंपनी इसे दिल्ली की पहचान से जोड कर इसका राजनीतिक इस्तेमाल करेगी। असल में केजरीवाल अब अपनी पार्टी को दिल्ली से बाहर ले जाने की हसरत भी रखते हैं और उन्हें लगता है कि यह दिल्ली का यह ‘हनुमान प्रयोग’ बाहर भी काम आएगा।

ईमानदार सरकार और 1.17 लाख करोड का बैंक फ्राड

पिछले साल एक अप्रैल से लेकर 31 दिसंबर के बीच यानी नौ महीनों में देश के सरकारी बैंकों को एक लाख 17 हजार करोड रुपए का चूना लगा है। इस हैरान करने वाली बात पर किसी का ध्यान नहीं है। यह आंकड़ा सरकार की ओर से सूचना के अधिकार कानून के तहत पूछे गए एक सवाल के जवाब में दिया गया है। इससे पहले संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले छह महीने का आंकड़ा दिया था और बताया था कि एक अप्रैल से 30 सितंबर के बीच 91 हजार करोड रुपए का बैक फ्रॉड हुआ है। यानी उसके बाद तीन महीने मे 27 हजार करोड रुपए का और फ्रॉड हो गया। यह भी हैरान करने वाली बात है कि जब से केंद्र में ‘ईमानदार’ और ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’ वाली सरकार आई है तब से बैंकिंग फ्रॉड में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। 2014-15 में जब यूपीए सरकार की विदाई हुई थी, उस साल कुल बैंकिंग फ्रॉड दस हजार करोड रुपए का था। उसके बाद बढ़ते हुए यह अब इस मुकाम पर पहुंच गया है कि नौ महीने मे एक लाख 17 हजार करोड़ रुपए का बैक फ्रॉड हो गया। एक हैरान करने वाली बात यह भी है कि 2019 से पहले के 11 वित्त वर्षों के दौरान 53 हजार मामलों में दो लाख पांच हजार करोड का बैंक फ्रॉड हुआ। जबकि 2019 के आखिरी नौ महीनो में सिर्फ 8926 मामलों में एक लाख 17 हजार करोड रुपए का फ्रॉड हो गया। यह तब हो रहा है, जब बैंकों की हालत खराब है और बैंक अतिरिक्त सावधानी बरत रहे है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि कौन खा रहा है और खाने दे रहा है!

योगी बनाम नीतीश

योगी आदित्यनाथ 2017 में उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद भाजपा के लिए महत्वपूर्ण स्टार प्रचारक बन गए हैं। हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद हुए सभी विधानसभा चुनावों में पार्टी को उनके आग उगलते भाषणों से फायदा कम और नुकसान ज्यादा हुआ है, लेकिन फिर दिल है कि मानता नहीं की तर्ज पर भाजपा उनकी ज्यादा से ज्यादा चुनावी सभाएं करवाती है। अभी हाल में दिल्ली के विधानसभा चुनाव में भी उनकी खूब सभाएं कराई गईं। दिल्ली के बाद अब अगला चुनावी दंगल बिहार में होने वाला है और भाजपा वहां भी योगी का ऐसा ही इस्तेमाल कर सकती है। लेकिन बिहार से नीतीश कुमार के करीबियों के जरिए जो खबरें आ रही हैं, उनके मुताबिक नीतीश नहीं चाहते योगी उनके सूबे में चुनाव प्रचार करने आए। कहा जा रहा है कि एनडीए का हिस्सा होने के बावजूद नीतीश कुमार की मुसलमानों में स्वीकार्यता है और उनका एक बडा वर्ग उनकी पार्टी को वोट देता है। लेकिन योगी अगर वहां माहौल गरमाएंगे तो धार्मिक आधार पर गोलबंदी की संभावना बढेगी, जिसका सीधा नुकसान जनता दल (यू) को होगा। दूसरे, अगर चुनाव धार्मिक आधार की गोलबंदी की गिरफ्त मे गया तो ‘विकास का चेहरा’ के रूप में नीतीश की जो एकमात्र यूएसपी है, वह ढंक जाएगी। इसलिए वे भाजपा नेतृत्व को समझाने में लगे हैं कि बिहार चुनाव से भडकाऊ भाषणबाजों को दूर रखा जाए और विकास के एजेंडा पर पूरा चुनाव लडा जाए। अब देखने वाली बात होगी कि भाजपा नीतीश का यह आग्रह स्वीकार करती है या नहीं।

चलते-चलते

दिल्ली के हूनर हाट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रसिद्ध बिहारी व्यंजन लिट्टी चोखा खाया, जिसकी तस्वीरें मीडिया और सोशल मीडिया में प्रचारित हुईं। कई लोगों ने इसे आने वाले बिहार चुनाव से जोडा। इसे चुनाव के मद्देनजर बिहारियों को रिझाने की कवायद बताया गया। कुछ लोग अब पूछ रहे हैं कि बिहार के बाद पश्चिम बंगाल में चुनाव होंगे तो वहां के लोगों को आकर्षित करने के लिए मोदी क्या खाते हुए तस्वीरें खिंचवाएंगे, क्योंकि बंगालियों का सबसे प्रिय भोजन माछ-भात है!

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