आधी से ज्यादा दुनिया इन दिनों भीषण सर्दी की चपेट में है। यह सर्दी का पलटवार है जो अपने पूरे शीत प्रभाव के साथ लोगों को हैरान-परेशान कर रहा है। न सिर्फ यूरोप और अमेरिका बल्कि भारत समेत समूचा उत्तरी गोलार्ध कडाके की सर्दी से ठिठुर रहा है और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। मौसम वैज्ञानिक इस असाधारण सर्दी के लिए पोलर वॉर्टेक्स (ध्रुवीय तूफान) को जिम्मेदार मान रहे हैं। आर्कटिक क्षेत्र में ध्रुवीय तूफान से हवाओं में उतार-चढाव के कारण ही बीते दिसंबर से लेकर अब तक दुनिया का उत्तरी हिस्सा ठंड से कंपकपा रहा है। वैज्ञानिक इस वैश्विक शीतलहर को ग्लोबल वार्मिंग के आसन्न खतरे की चेतावनी के तौर पर देख रहे हैं।

मौसम के कहर को देखते हुए अमेरिका के कई हिस्सों में इमर्जेंसी लागू कर दी गई है। इलिनॉयस, विस्कॉन्सिन, अलाबामा और जॉर्जिया में भीषण बर्फबारी की आशंका व्यक्त की गई है। सर्दी के सितम से देश के अलग-अलग इलाकों में अब तक सात लोगों की मौत की खबर है। इस दौरान शिकागो में तो तापमान शून्य 30 डिग्री नीचे जा चुका है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में हालात और बिगडेंगे तथा यह शहर अंटार्कटिका से भी ज्यादा ठंडा हो सकता है। मौसम विभाग ने तापमान के शून्य से 40, यहां तक कि 70 डिग्री सेल्सियस तक नीचे जाने की चेतावनी जारी की है।

ब्रिटेन में भी हालात बदतर है, जबकि ऑस्ट्रेलिया को बेमौसम की भारी बारिश चलते सदी की सबसे भयानक बाढ का सामना करना पड रहा है। नदियों का पानी सडकों पर और घरों में घुस जाने से देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में हजारों लोगों को अपने घरों से विस्थापित होना पडा है। क्वींसलैंड के टाउंसविले शहर में हजारों लोग बिना बिजली के रह रहे हैं। क्वींसलैंड की मेयर का कहना है कि यह 100 साल में एक बार होने वाली घटना है।

इधर हमारे यहां भारत में भी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत समूचा उत्तर भारत इस लौटी हुई शीतलहर की चपेट में आकर कंपकपा रहा है। बर्फीली हवाओं ने रात ही नहीं, चमकीली धूप के बावजूद दिन को भी ठंडा दिया है। पहाडों पर लगातार बर्फ गिरने से आए इस मौसमी बदलाव ने दिल्ली का बीते आठ साल का रिकॉर्ड तोड दिया है। जम्मू-कश्मीर में भी हाल ही में सर्दी का करीब तीन दशक पुराना रिकॉर्ड टूट गया है।

इस बार उन पहाडी इलाकों में भी बर्फबारी हुई है, जहां पिछले दस वर्षों से बर्फ नहीं गिरी थी। इसी क्रम में सुदूर ओडिशा और छत्तीसगढ जैसे राज्यों को भी सर्दी ने सिहरा दिया है, जहां अपेक्षाकृत सर्दी बहुत कम पडती है। राजस्थान के चुरू का तापमान भी शून्य से नीचे दर्ज किया जा चुका है। मौसम विभाग के मुताबिक पलटकर आई इस शीतलहर के पीछे भी ध्रुवीय तूफान हो सकता है।

ग्लोबल वार्मिंग को लेकर जारी चर्चाओं के बीच सर्दी के इस प्रकोप के चलते लोग सवाल कर रहे हैं कि जब ग्लोबल वार्मिंग हो रही है तो इतनी सर्दी कहां से आ गई? इस सिलसिले में एक दिलचस्प खबर अमेरिका से यह भी आई है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने देश में जारी भीषण शीतलहर के मद्देनजर ट्वीट करके कहा है कि ग्लोबल वार्मिंग आ ही जाना चाहिए। इस पर लोगों ने उनकी काफी खिल्ली भी उडाई। हमारे यहां भी कोई एक दशक पहले ग्लोबल वार्मिंग को लेकर गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और देश के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसी ही अटपटी बात कही थी। छात्रों के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि ग्लोबल वार्मिंग जैसा कुछ है ही नहीं, बल्कि यह तो यूरोप के वैज्ञानिकों और बुद्धिजीवियों का खडा किया हौवा है। हालांकि प्रधानमंत्री बनने के बाद उनके विचार बदल गए और वे भी ग्लोबल वार्मिंग के खतरे को स्वीकार करने लगे हैं।

बहरहाल, वैज्ञानिकों ने ट्रंप के बयान के बाद स्पष्ट किया है कि ग्लोबल वार्मिंग का मतलब मौसम का गरम हो जाना नहीं, बल्कि जलवायु का असंतुलित और मौसम चक्र का गडबडा जाना है। ताजा वैश्विक शीतलहर को एक तरह की चेतावनी मानते हुए विश्व बिरादरी को ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए जारी अभियानों को और तेज करना होगा।

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