कांग्रेस के हवाबाज रणनीतिकार

देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस अपने इतिहास के सर्वाधिक बुरे दौरे से गुजर रही है। विभिन्न राज्यों में या तो उसके नेताओं की आपसी सिरफुटौवल चल रही है या फिर लोग पार्टी छोड भाजपा में भर्ती हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इतना सब होने के बाद भी कांग्रेस के हवाबाज रणनीतिकार सबक लेने को तैयार नहीं है। सोनिया गांधी के अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद तय हुआ कि मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों के विरोध में पार्टी 15 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक आंदोलन चलाएगी। इन तारीखों का ऐलान होते ही पार्टी में कई नेताओं ने अपना माथा ठोक लिया। दरअसल जिन तारीखों में आंदोलन का ऐलान हुआ है, वह पूरी तरह से त्योहारी समय होता है। 8 अक्टूबर को दशहरा के बाद दीपावली की तैयारियां शुरू हो जाएंगी। 25 अक्टूबर को धनतेरस से दीपोत्सव शुरू हो जाएगा। यह समय ऐसा माना जाता है, जिसमें पार्टी के मैदानी स्तर के कार्यकर्ता से लेकर आमजन तक त्योहार की तैयारी में जुटे होते हैं। इसलिए कोई भी पार्टी इस दौरान जनांदोलन या सम्मेलन जैसे कार्यक्रमों से बचती है। लेकिन कांग्रेस के रणनीतिकारों को लंबी अरसे के बाद आंदोलन की सूझी तो उसने ऐसी तारीखों को चुना, जिसमें आंदोलन का फुस्स होना तय है।

दुनिया के सारे प्रधानमंत्री-राष्ट्रपति झूठे!

भारत सरकार की ओर से नया दावा मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद का ‘झूठ’ पकडने का किया गया है। असल में महातिर मोहम्मद ने कहा है कि दुनिया का कोई भी देश जाकिर नाईक को अपने यहां नहीं रखना चाहता। यहां तक कि भारत भी नहीं। उन्होंने दो टूक अंदाज में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी भी उनसे जाकिर नाईक के प्रत्यर्पण की मांग नहीं की। ध्यान रहे भारत पहले कहता रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने महातिर से जाकिर नाईक को भारत भेजने को कहा था। जब महातिर ने कहा कि मोदी ने नहीं कहा है तो खुद विदेश मंत्री एस शिवशंकर ने महातिर को ‘झूठा’ ठहराते हुए कहा कि मोदी ने महातिर से मुलाकात में नाईक को भेजने के लिए कहा था। इससे पहले भारत ने फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद का ‘झूठ’ पकड़ा था। ओलांद ने कहा था कि राफेल विमान सौदे में भारत सरकार के कहने पर अनिल अंबानी की कंपनी को ऑफसेट पार्टनर बनाया गया। ओलांद के दावे को गलत बताते हुए भारत ने कहा कि सरकार ने अंबानी की कंपनी के बारे में कुछ नहीं कहा था। ताजा मामला अभी पिछले दिनों का है जब भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ‘झूठ’ पकड़ा। ट्रंप ने कहा कि मोदी ने उनसे कश्मीर मसले पर मध्यस्थता के लिए कहा था। भारत ने कहा कि मोदी ने ऐसा नहीं कहा था। तो यह माना जाए कि दुनिया के सारे प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भारत के मौजूदा प्रधानमंत्री से ईर्ष्या करते हैं और इसलिए वे भारत के बारे में ‘झूठ’ बोलते रहते हैं।

भाजपा में गडकरी की घेराबंदी

केंद्र में दूसरी बार मोदी सरकार बनने के बाद से भाजपा की आंतरिक राजनीति में परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की तगडी घेराबंदी हो रही है। पिछले दिनों प्रधानमंत्री कार्यालय से एक चिट्ठी लीक होकर सोशल मीडिया में आ गई, जिसके आधार पर कई खबरें बनीं। यह चिट्ठी प्रधानमंत्री के तत्कालीन प्रमुख सचिव नृपेंद्र मिश्रा ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की गडबडियों को लेकर लिखी थी। बाद में गडकरी ने इस पर सफाई दी और बताया कि चिट्ठी सार्वजनिक करने वाले अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। यह मामला ठंडा भी नहीं हुआ कि गडकरी नए मोटर वाहन कानून के झमेले में फंस गए हैं। विपक्ष शासित राज्यों की सरकारों ने तो इसे लागू करने से इनकार किया ही है, भाजपा की राज्य सरकारों ने भी या तो दो टूक अंदाज में इसे लागू करने से मना कर दिया है या मनमाने तरीके से जुर्माने की राशि घटा दी। शुरुआत गुजरात से हुई, जहां मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने जुर्माने की राशि आधी कर दी। उत्तराखंड सरकार ने भी ऐसा ही किया। महाराष्ट्र सरकार ने तो इसे लागू करने से ही मना कर दिया। सवाल है कि एक बडे नीतिगत मसले पर भाजपा के मुख्यमंत्री क्या बगैर आलाकमान की सलाह के फैसले कर रहे हैं? ऐसा फैसला करने से पहले गडकरी से बात क्यों नहीं की गई? पार्टी के आला नेता इस मसले पर क्यों चुप हैं? गडकरी को यह लड़ाई अकेले क्यों लडनी पड रही है?

दूसरे मुख्यमंत्रियों से अलग हैं कैप्टेन

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने कई मौकों पर साबित किया है कि वे अपनी पार्टी में दूसरे मुख्यमंत्रियों से अलग हैं। इस बार भी उन्होंने अपने भरोसेमंद सुनील जाखड को पंजाब प्रदेश कांग्रेस का दोबारा अध्यक्ष बनवा कर इस बात को साबित किया। गौरतलब है कि सुनील जाखड गुरदासपुर सीट से लोकसभा चुनाव हार गए थे। राज्य में कांग्रेस की लहर होने के बावजूद चुनाव हारने पर उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। लेकिन कैप्टेन ने सोनिया गांधी से बात कर उनका इस्तीफा नामंजूर करा दिया। अब सुनील जाखड अध्यक्ष बने रहेंगे। बाकी तीन मुख्यमंत्रियों को ऐसी सुविधा नहीं है। छत्तीसगढ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ही प्रदेश अध्यक्ष थे। उन्होंने मुख्यमंत्री बनने के बाद अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया तो पार्टी ने नया अध्यक्ष नियुक्त करने में उनकी पसंद को तवज्जो नहीं दी। इसी तरह यह तय है कि मध्य प्रदेश मे मुख्यमंत्री कमलनाथ की जगह उनकी पसंद का अध्यक्ष नहीं बनेगा। राजस्थान में तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के विरोधी सचिन पायलट ही अध्यक्ष हैं और उनका प्रयास है कि किसी तरह से अध्यक्ष बने रहे। वां भी जो नया अध्यक्ष बनेगा वह गहलोत और पायलट की पसंद का तो नहीं ही होगा।

केजरीवाल का चुनावी एजेंडा

चार-पांच महीने बाद दिल्ली विधानसभा के चुनाव होना है, लिहाजा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पूरी तरह चुनावी मोड में हैं। उनका मकसद अपने एजेंडे में विपक्षी पार्टियों को इस तरह उलझाए रखना है कि वे अपना कोई एजेंडा दिल्ली के लोगों के लिए पेश कर सके। उन्होंने इस समय पूरी दिल्ली को डेंगू से लड़ने के अभियान मे लगा रखा है। वे खुद भी जुटे हैं और हर दिन विज्ञापन देकर लोगों से हर रविवार को दस मिनट देने और जहां भी पानी जमा हो उसे हटाने की अपील कर रहे हैं। इसी तरह उन्होंने प्रदूषण से लडने के लिए ऑड ईवन सहित सात सूत्री एजेंडा पेश कर दिया है। इससे पहले 2016 मे जब हालात बहुत बिगड गए थे तब ऑड ईवन लागू किया गया था। उसके बाद दो साल केजरीवाल चुपचाप बैठे रहे पर चुनाव से पहले उन्होंने इस मुद्दे को छेड दिया है। सो, सब इसकी आलोचना या समर्थन में व्यस्त हो गए हैं। अगले महीने 29 अक्टूबर को यानी भाई दूज के रोज केजरीवाल दिल्ली परिवहन निगम की बसों में महिलाओं की मुफ्त यात्रा की योजना शुरू कर रहे हैं। दिल्ली मेट्रो में भी महिलाओं की मुफ्त यात्रा का प्रस्ताव उन्होंने दिया हुआ है। इसके समर्थन और विरोध में बहस जारी है। चुनाव तक मुफ्त वाई फाई, सीसीटीवी कैमरे आदि का माहौल वे बनाए रखेंगे। हो सकता है कि कुछ और चौंकाने वाली चीजें वे अपने पिटारे से निकाले।

टीएमसी बनाम पीके

बंगाल से जो खबरें आ रही हैं कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता पार्टी में प्रशांत किशोर (पीके) की दखलंदाजी से खुश नहीं हैं। वजह वही है जिसके चलते उत्तर प्रदेश के कांग्रेसी नेता नाराज थे। टीएमसी नेताओं को भी लग रहा है कि पीके उन्हें ‘निर्देशित’ कर रहे हैं, जबकि वे पीके से ज्यादा अच्छी तरह जानते हैं कि उन्हें क्या करना है और क्या नहीं। ईगो की इस लड़ाई का नतीजा ही कहा जा सकता है कि पीके के कई एक्शन प्लान पर या तो अमल शुरू ही नहीं हो सका या महज रस्म अदायगी बन कर रह गया। इस मुद्दे पर दोतरफा शिकायतें हो रही हैं। एक तरफ जहां पीके ने टीएमसी सुप्रीमो ममता से पार्टीजनो के सहयोग न मिलने की शिकायत दर्ज कराई है, वही कई मंत्रियों ने यह शिकायत दर्ज कराई है कि पीके की टीम प्रशासनिक कामों में अनावश्यक हस्तक्षेप कर रही है। मंत्रालयों का कामकाज उन्हें पीके से नहीं सीखना है। दो तरफा तर्क-वितर्क के चलते राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि चुनाव तक पीके का जुड़ाव टीएमसी तक रहेगा भी या नहीं। कुछ लोग चुटकी ले रहे है कि अगर पीके को अंदाजा हो गया कि दीदी सत्ता में वापसी नहीं कर रही हैं तो वह चुनाव से पहले ही टीएमसी से अलग होने में कोई संकोच नहीं करेंगे।

चलते-चलते

अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में पिछले तीन-चार दिनों जारी भारी बारिश की वजह से वहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप की मौजूदगी में होने वाला ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम रद्द होने के आसार बनते जा रहे हैं। भाजपा की एनआरआई कार्यक्रम समिति ने बारिश रुकवाने के लिए मेंढक-मेंढकी का तलाक कराने वाले पंडित को चार्टर्ड प्लेने से अमेरिका भिजवाने की मांग की है।

 

 

 

 

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