मसूद अज़हर को चुनावी लाभ के लिए आतंकी घोषित कराने के फेर में मोदी सरकार ने  देश का बड़ा नुकसान कर  दिया है।  भारत सरकार ने दस पहले उसे आतंकी घोषित करने का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र संघ में रखा था, लेकिन चीन इसे रोक रहा था।  पुलवामा हमले के बाद भारत ने यह कोशिश तेज़ कर दी थी।  चीन ने इस पर तकनीकी रोक लगा दी थी।  इस बार उसने इसे हटा लिया और अमेरिका तथा फ्रांस के प्रस्ताव को पारित होने दिया क्योंकि उस पर इन दोनों देशों का दबाव था।  दरअसल, अमेरिका ईरान से हमारे देश को हो रहे  सस्ते तेल के आयात  को रोकना चाहता था और हमारे आपसी संबंधों को ध्वस्त करना चाहता था।  इसमें वह सफल रहा।  मनमोहन सिंह ने इसे लेकर कोई सौदा नहीं किया और अपनी ताकत पर इसे कराने की कोशिश करते रहे।

टीवी पर न्यूज़ चैनल के सारे एंकरो-एंकरनियो को काम पर लगा दिया है वो शाम से मसूद अजहर पर यूएन  के प्रतिबंध को बीजेपी सरकार की कूटनीतिक सफलता और मोदी जी की महान कामयाबी सिद्ध करने में लगे है और भोलीभाली जनता को झूठे राष्ट्रवाद का तगड़ा डोज पिलाए जा रहे है।

ऐसा इसलिए भी है कि इस मई के महीने के आखिर तक पेट्रोल के दाम यदि ५ से ६ रूपये भी बढ़ जाए तो भी इस डोज का नशा बराबर काम करता रहे।

दरसल यह कूटनीतिक सफलता नहीं है कूटनीतिक असफलता है। .यूएन में  अमेरिका भारत का समर्थन करेगा, यह संकेत उसने 8 दिन पहले ही दे दिए थे। अमेरिका ने भारत से कहा कि वह यूनाइटेड नेशंस सिक्‍योरिटी काउंसिल (यूएनएससी) में मसूद अजहर के मुद्दे पर उसकी मदद कर रहा है,  इसलिए अब भारत को ईरान से तेल का आयात बंद करना होगा।  ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत का साथ दे रहा है।  इसलिए अब भारत की बारी है कि वह राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की उस प्रतिबद्धता का सम्‍मान करे जिसके तहत ईरान में स्थित आतंकी  नेटवर्क को खत्‍म करने पर एक्‍शन लिया जाना है। 

नवंबर 2018 में अमेरिका ने देशों को छह माह का अल्टीमेटम दिया था कि वह ईरान से तेल आयात को जीरो करें। हालांकि भारत समेत आठ देशों को अमेरिका ने छूट दी थी जो कल 2 मई को समाप्त हो जाएगी। नतीजा यह होगा कि भारत जो ईरान से सस्ता तेल अब तक खरीद रहा था, उसे अंतराष्ट्रीय बाजार से महंगा तेल खरीदना होगा।

अमेरिका के इस संदेश में परोक्ष रूप से इस बात के संकेत दिए गए थे कि भारत फैसला करे कि उसे ईरान से तेल खरीदना है अथवा मसूद अजहर पर प्रतिबंध के मामले में अमेरिकी मदद हासिल करना है।

अब अमेरिका के अहसान तला भारत और कोई अलग रुख अपना नही पाएगा।  मोदी में विदेश नीति की ज़रा भी समझ होती तो वह इस बेवकूफाना शर्त को मानने से साफ़ इंकार कर देते, अब आम जनता को मोदीजी की इस बेवकूफी की कीमत लगातार महंगे होते पेट्रोल डीजल के दामों से चुकाना होगी। वाकई   गोदी  मीडिया आपको यह बात कभी नहीं बताएगा।

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