‘भाई’ की धमक फिर लौटी

कांग्रेस की अंदरुनी राजनीति में ‘भाई’ यानी अहमद पटेल एक बार फिर ‘फुल फॉर्म’ में लौट आए हैं। वैसे सोनिया गांधी के सबसे अधिक भरोसेमंद होने की वजह से उनका दबदबा तो हमेशा रहा है, लेकिन राहुल गांधी के पार्टी अध्यक्ष रहते हुए वे किनारे कर दिए गए थे। अब पार्टी की कमान फिर से सोनिया के हाथों में आने के बाद उनकी स्थिति फिर से बदल गई है। पार्टी के भीतर से आ रही खबरें बता रही हैं कि अहमद भाई की मर्जी के बगैर पार्टी में पत्ता भी नहीं खडक रहा है। सबसे ज्यादा टेंशन में वे लोग हैं जो राहुल की टीम में होने के चलते ‘भाई’ को नजरअंदाज करने लगे थे। अब चर्चा है कि जल्दी ही ‘टीम राहुल’ पार्टी के भीतर हाशिए पर होगी। सोनिया गांधी भले ही अंतरिम अध्यक्ष हों लेकिन माना जा रहा है कि उनका यह कार्यकाल लंबा खिंचेगा। राहुल के ‘सुरक्षित भविष्य’ के मद्देनजर 2024 का लोकसभा चुनाव भी सोनिया गांधी के नेतृत्व में ही लडे जाने की संभावना है। अगर ऐसा होता है तो ‘भाई’ का जलवा भी तब तो कायम रहेगा ही।

हरियाणा में अकेले लडेंगे हुड्डा

कांग्रेस आलाकमान ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंदर सिंह हुड्डा को राज्य में चुनाव प्रबंधन की कमान सौंप दी है। कुमारी शैलजा को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अध्यक्ष बना कर राज्य में जाट और दलित समीकरण भी बना दिया है। पर ऐसा लग रहा है कि चुनाव में सब कुछ हुड्डा को अकेले ही करना होगा क्योंकि आलाकमान के बहुत साफ मैसेज के बावजूद पार्टी के सारे बड़े नेता अलग राह पर चल रहे हैं। करीब छह साल तक प्रदेश अध्यक्ष रहे अशोक तंवर और पांच साल तक विधायक दल की नेता रहीं किरण चौधरी दोनों हुड्डा का विरोध कर रहे हैं। अशोक तंवर और किरण चौधरी दोनों हुड्डा या शैलजा की बुलाई बैठकों में हिस्सा नहीं ले रहे हैं। हरियाणा कांग्रेस के तीसरे बड़े नेता रणदीप सुरजेवाला हैं, जिनको कांग्रेस आलाकमान का बेहद करीबी माना जाता है और जिन्हें पार्टी की मीडिया विभाग का प्रभारी बनाया गया है, वे भी हुड्डा के समर्थन में नहीं हैं। इसलिए किरण चौधरी, तंवर और सुरजेवाला तीनों के प्रत्यक्ष या परोक्ष विरोध के बीच हुड्डा को विधानसभा चुनाव की तैयारी करनी है और लड़ना है। इनमें से तंवर दलित हैं और किऱण चौधरी व सुरजेवाला जाट हैं। यानी कांग्रेस ने जो समीकरण बनाया है उसी में फूट पड़ी हुई है।

चुनाव आयुक्त लवासा पर राजनीति का डंडा

चुनाव आयुक्त अशोक लवासा के परिवार की मुश्किलें बढना शुरू हो चुकी हैं। अशोक लवासा इकलौते चुनाव आयुक्त हैं, जिन्होंने लोकसभा चुनाव के समय आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कई मामलों में क्लीन चिट दिए जाने पर आपत्ति की थी। खास तौर पर पुलवामा में शहीद सैनिकों और सेना की कार्रवाई के नाम पर वोट मांगने के मामले में वे यहां तक चाहते थे कि उनकी आपत्तियों को ऑन रिकार्ड दर्ज किया जाए। पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनकी मांग को खारिज कर दिया था। उनकी आईएएस बेटी अन्वी लवासा ने भी भाजपा के लिए मुश्किल खडी की थी। अन्वी लवासा लद्दाख की कलेक्टर है और उन्होंने लोकसभा चुनाव में कुछ भाजपा नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की थी। लोकसभा चुनाव के समय अशोक और अन्वी लवासा काफी चर्चा में थे पर अब अशोक लवासा की पत्नी नोवेस लवासा चर्चा में हैं। उनको आय कर विभाग ने नोटिस जारी किया था और पिछले दिनों उनसे पूछताछ की गई है। बताया जा रहा है कि आय कर विभाग को उनके खिलाफ टैक्स रिटर्न भरने के मामले में कुछ गडबडी का पता चला है। उनका कहना है कि वे बैकिग सेवा में थी और उन्होंने बिल्कुल सही रिटर्न भरा हुआ है। पर आय कर विभाग की जांच तो चलेगी। क्योंकि इन दिनों हर राजनीतिक समस्या का रामबाण इलाज आय कर विभाग, ईडी, सीबीआई आदि ही है।

ट्रंप का होगा चुनावी इस्तेमाल

अमेरिका में बसे करीब 50 हजार भारतीयों की मौजूदगी में ‘अबकी बार फिर ट्रंप सरकार’ का नारा लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत पिछले रविवार को ह्यूस्टन में कर आए हैं। अब बारी ट्रंप की है। वे अगले महीने भारत आने वाले हैं। यहां वे मुंबई में आयोजित बास्केट बॉल का टूर्नामेंट में शामिल होंगे। अमेरिका मे बास्केट बॉल बहुत लोकप्रिय खेल है और एनबीए के लीग मैचों में भारी भीड जुटती है। पहली बार भारत में एनबीए की ओर से इस टूर्नामेंट का आयोजन किया जा रहा है। अक्टूबर में जिस समय यह टूर्नामेंट चल रहा होगा, उस समय महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव का प्रचार चरम पर होगा। गौरतलब है कि मुंबई में ट्रंप का अपना कारोबार है। उनकी कंपनी वहां रियल इस्टेट में काफी काम कर रही है। उसी समय हरियाणा में भी चुनाव होने वाले हैं। मुंबई और हरियाणा के गुडगांव में कई ट्रंप टॉवर बन रहे हैं। जिस तरह मोदी की अमेरिका यात्रा में भारतीय-अमेरिकियों के कार्यक्रम में ट्रंप शामिल हुए, उसी तरह अगर ट्रंप मुंबई आते हैं तो उनके कार्यक्रम में मोदी भी जरूर शामिल होंगे। इस तरह चुनाव प्रचार में अपने आप ट्रंप का इस्तेमाल हो जाएगा। याद रहे कि दो साल पहले गुजरात के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने गुजरात का दौरा किया था। उनके दौरे को भी बडा इवेंट बना दिया गया था। चुनावी रैलियों के अंदाज में गुजरात की सडकों पर उनका रोड शो हुआ था।

कांग्रेस प्रवक्ताओं का दर्द

टीवी चैनलों पर भाजपा के प्रति समर्पित एंकरों की बदतमीजियों के चलते कांग्रेस नेतृत्व ने टीवी डिबेट में अपने प्रवक्ताओं के शामिल होने पर पाबंदी लगा रखी है, लेकिन पार्टी के कई प्रवक्ताओं को यह पाबंदी रास नहीं आ रही है। वजह यह है कि इन प्रवक्ताओं का कोई जनाधार नहीं है। उनकी राजनीति को टीवी डिबेट से ही ऑक्सीजन मिलती रही है, भले ही डिबेट के दौरान उनका अपमान और पार्टी की फजीहत होती हो। अब जब पार्टी की ओर से टीवी चैनलों का बहिष्कार लंबा खिंचता जा रहा है तो इन प्रवक्ताओं का चिंतित होना भी स्वाभाविक है। इसलिए अब यह राय बनाने की कोशिश हो रही है कि डिबेट में शामिल होना चाहिए और भाजपा की ठीक से धुलाई की जानी चाहिए। राजस्थान के एक प्रवक्ता गौरव वल्लभ का उदाहरण दिया जा रहा है। गौरव वल्लभ एक टीवी चैनल के लाइव कार्यक्रम में भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा को शर्मसार करने की वजह से चर्चा में हैं। पात्रा ने जैसे ही पांच ट्रिलियन इकॉनमी की बात उठाई, गौरव ने उनसे पूछ लिया कि ट्रिलियन में कितने जीरो होते हैं। पात्रा जवाब नहीं दे पाए तो गौरव ने बताया कि एक ट्रिलियन में 12 जीरो होते हैं। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल है। खबर है कि सोनिया और राहुल ने भी वल्लभ की पीठ थपथपाई है। देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस नेतृत्व चैनलों के बहिष्कार के अपने फैसले पर पुनर्विचार करता है या नहीं।

कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा के नाम पर

कांग्रेस को छोडकर लगभग सभी बडी पार्टियों के मुख्यालय लुटियन की दिल्ली से स्थानांतरित हो चुके हैं। अब कांग्रेस का मुख्यालय भी 24, अकबर रोड से हटाया जाना तय हो गया है। भाजपा का मुख्यालय पहले ही स्थानांतरित होकर दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर चला गया है। कांग्रेस को भी इस इलाके में जमीन 2009 में ही आबंटित हो गई थी, जहां निर्माण अब काम तेजी से चल रहा है और कहा जा रहा है कि अगले साल कांग्रेस का मुख्यालय इस इलाके में शिफ्ट हो जाएगा। कांग्रेस के नए पते में दीनदयाल उपाध्याय मार्ग का नाम नहीं होगा, बल्कि नया पता होगा नौ, कोटला मार्ग। बताया जा रहा है कि इस मुख्यालय का नाम पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नाम पर रखा जाएगा। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाम पर इसका नाम नेहरू भवन भी रखा जा सकता था। पर उसकी बजाय इंदिरा भवन नाम रखने का फैसला क्यों किया गया, इस बारे में कांग्रेस के नेता कुछ नहीं बता रहे हैं। मगर समझा जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने जिस तरह से देश की हर समस्या के लिए नेहरू को जिम्मेदार ठहराया है, उसकी वजह से कांग्रेस नेताओं को नेहरू का नाम इस्तेमाल करने में डर लग रहा है। कांग्रेस नेताओं को लगता है कि जिस तरह से इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान का बंटवारा कराया था, उसकी वजह से उनका नाम आज भी लोगों के जेहन में हैं और लंबे समय तक रहेगा।

चलते-चलते

अमेरिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संयुक्त पत्रकार वार्ता कर रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिन भारतीय पत्रकारों की ओर इशारा कर मोदी से पूछा कि आपको ऐसे पत्रकार कहां से मिल जाते हैं, वे पत्रकार निश्चित ही से गर्व से भर गए होंगे। उन्हें लग रहा होगा कि प्रधानमंत्री की नजरों में उनकी अहमियत कितनी बढ गई है। उन्हें इस बात का भी गर्व होगा कि उन्हें ट्रंप ने देशभक्त होने का सर्टिफिकेट दिया है। अमेरिकी अखबारों में चटखारे ले रहे है कि अब खतरा यह है कि देशभक्ति के इस सर्टिफिकेट को लेकर वे पत्रकार कहीं खुद ही खुद ही पाकिस्तान पर हमला करने न चल दें।

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