कूटनीतिक मामलों में चीन भारत को अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोडता। इस समय भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर चीन की यात्रा पर हैं। वे जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा खत्म करने के मसले पर चीनी नेतृत्व को भारत का पक्ष समझाने तथा चीन का समर्थन हासिल करने के मकसद से वहां गए हुए हैं। वहां पहुंचकर उन्होंने बयान दिया कि भारत और चीन को एक दूसरे की चिंताओं का सम्मान करना चाहिए। भारतीय विदेश मंत्री के बयान में कुछ भी गलत नहीं है। लेकिन अहंकारी और खुदगर्ज चीनी नेतृत्व ने पहले कभी भारत की चिंताओं का सम्मान किया हो तो अब करे।

चीन ने एस. जयशंकर के बयान पर सकारात्मक प्रतिक्रिया जताने के बजाय उनकी चीन में मौजूदगी के दौरान ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से मांग कर डाली कि कश्मीर मसले पर विचार करने के लिए सुरक्षा परिषद की ‘बंद कमरा बैठक’ बुलाई जाए। भारतीय विदेश मंत्री के बयान को नजरअंदाज करते हुए अपने देश में उनकी मौजूदगी के चलते ही चीन का यह पैंतरा स्पष्ट रूप से भारत का अपमान है।

चीनी राजनयिकों के मुताबिक सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष ने चीन की मांग मान ली है और शुक्रवार को ही कश्मीर मसले पर सुरक्षा परिषद की ‘बंद कमरा बैठक’ होने जा रही है। सुरक्षा परिषद में कश्मीर मसले पर चर्चा अपने आप में काफी दुर्लभ मामला है। पिछली बार 1965 में इस मसले पर सुरक्षा परिषद की पूर्ण बैठक में चर्चा हुई थी।

गौरतलब है कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने के भारत के आंतरिक मामले को संयुक्त राष्ट्र में उठाकर उसका औपचारिक रूप से अंतरराष्ट्रीयकरण करने के लिए छटपटा रहा है। इस सिलसिले में वह हर मुमकिन पैतरेबाजी कर रहा है। इस्लामाबाद ने ही सबसे पहले कश्मीर मसले पर सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की थी। उसकी इस कोशिश को अब स्पष्ट रूप से चीन का साथ मिल गया है। वैसे खुद चीन भी लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग कर केंद्र शासित इलाका बनाने के फैसले पर अपना ऐतराज पहले ही जता चुका है और अब उसने सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने की मांग कर स्पष्ट रूप से जता दिया है कि वह कश्मीर मसले पर पाकिस्तान के साथ है।

चीन की यह हरकत चार दशक पुराने उस वाकये की याद ताजा कराने वाली है, जब जनता पार्टी की सरकार के विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भारत-चीन द्विपक्षीय रिश्तों में सुधार के लिए चीन की यात्रा पर गए थे। उस समय चीन और विएतनाम के बीच तनातनी चल रही थी, जिसके मद्देनजर वाजपेयी को सलाह दी गई थी कि वे इस समय चीन की यात्रा न करें। चीन के नापाक इरादों के प्रति आगाह करते हुए यह सलाह देने वालों में समाजवादी नेता मधु लिमये भी थे, जो उस समय जनता पार्टी के महासचिव थे। लेकिन वाजपेयी उनकी सलाह को नजरअंदाज करते हुए चीन गए थे। उस समय भी चीन ने भारतीय विदेश मंत्री की अपने यहां मौजूदगी के चलते ही भारत के मित्र देश विएतनाम पर हमला कर दिया था, जिसकी वजह से वाजपेयी को अपनी यात्रा अधूरी छोड कर भारत लौटना पडा था।

 

Comments