क्या  चुनाव आयोग मतदान के आंकड़ों में हेराफेरी कर इस 2019 के लोकसभा चुनाव में बहुत बड़ा घोटाला कर सकता है?
इसकी आशंका फोन पर मित्र अपूर्व भरद्वाज ने  जाहिर की तो मै भी एकबारगी चौक गया।  अपूर्व डेटा एनिलिसिस के पुराने खिलाड़ी रह हैं।  इसलिए उनकी बात वजन रखती हैं। .उन्होंने बताया कि इस बार चुनाव आयोग ने एक एप्प बनाई है जिसका नाम है ‘वोटर टर्नआउट ऐप’। .  इस ऐप के माध्यम से मतदान के दौरान रियल टाइम में यह जाना जा सकता है कि वोटरों की संख्या कितनी रही,  किस चरण में कहां-कितना प्रतिशत मतदान हुआ. इस एप के माध्यम से ही उन्हें यह पता लगा कि चुनाव आयोग द्वारा २९ अप्रैल की  शाम को रिलीज किये गए मतदान के आंकड़ों ओर ३० अप्रैल की दोपहर को जारी आंकड़ों में बहुत परिवर्तन आ गया है जिससे यह महसूस हो रहा है कि वाकई ‘कुछ बड़ा होने वाला है’।
इसे जब मैंने   क्रॉस चेक किया तो यह बात बिल्कुल सच निकली।  खुद चुनाव आयोग की वेबसाइट पर मौजूद आंकड़ों से यह बात सही सिद्ध हो रही है।
कल 29 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में नौ राज्यों की 72 लोकसभा सीटों पर वोट डाले गए ओर रात 9:39 तक 63.16 फ़ीसदी मतदान दर्ज किया गया।   इलेक्शन कमीशन की वेबसाइट से लिया गया   स्क्रीन शॉट संलग्न है। इसके अनुसार २९ अप्रैल को  निम्न प्रदेशों में इतने प्रतिशत मतदान देखा गया
बिहार 58.02%
जम्मू कश्मीर 9.79%
मध्यप्रदेश 69.39%
महाराष्ट्र 55.86%
ओडिशा 64.24%
राजस्थान 67.91%
उत्तर प्रदेश 58.84%
पश्चिम बंगाल 76.72%
झारखंड 64.38%
लेकिन जब आज यह इलेक्शन कमीशन की वोटर टर्नआउट ऐप’ पर डेटा अपडेट हुआ तो 2 राज्यों में तस्वीरे पूरी तरह से बदल चुकी थी।  ये 2 राज्य है उड़ीसा ओर पश्चिम बंगाल।
इन दोनों राज्यों में मतदान का प्रतिशत अचानक से लगभग 7 से 8 प्रतिशत बढ़ गया।  अब ओडिशा में यह 64.24%से बढ़कर सीधे 72.89% हो गया और पश्चिम बंगाल में 76.72% से सीधा बढ़कर 82.77% हो गया।  बाकी राज्यों में भी थोड़ी घट बढ़ हुई है जैसे महाराष्ट्र में 55.86% से 56.61% हुआ है, राजस्थान में 67.91% से 68.16% हुआ है।
लेकिन इन दो राज्यों में जहाँ बीजेपी की स्थिति सबसे कमजोर है और सारी ताकत उसने इन्ही 2 राज्यों पर लगा रखी है।  उन्हीं 2 राज्यों के मतदान के आंकड़ों में इतना बड़ा परिवर्तन कैसे आ गया।  यह बात हैरान कर देती है।
डाटा एनिलिसिस को बहुत नजदीक से समझने वाले मित्र अपूर्व इस बारे में विस्तार से बतलाते है। डाटा विश्लेषण में डाटा क्लीनिंग एक टर्म होता है।  सब विश्लेषक जानते है डाटा में त्रुटि हो होती है को-रिलेशन मैट्रिक्स और स्टैंडर्ड डिवीएशन की थ्योरी को जानने वाले इसकी महत्ता को जानते है।  चुनावों में प्रतिशत त्रुटि की स्वीकार्यता उसकी सटीकता पर निर्भर करती है। कुछ मामलों में, यह इतना मुश्किल हो सकता है कि 3% की गलती है या इससे अधिक स्वीकार्य नही हो सकता है। कुछ मामलों में, 1% त्रुटि बहुत अधिक हो सकती है। अधिकांश डाटा विश्लेषक 3% त्रुटि स्वीकार करेंगे। लेकिन यह केवल एक दिशानिर्देश है।विश्लेषण के उच्च स्तर पर, आमतौर पर उच्च सटीकता की आशा करते है।  में यूपी 2014 लोकसभा का उदाहरण देता हूँ।  वँहा त्रिकोणीय संघर्ष था और केवल 42 ℅ वोट पाकर बीजेपी ने 73 से ज्यादा सीट प्राप्त कर लिया था।  अगर इस हिसाब से देखे तो उड़ीसा और बंगाल में त्रिकोणीय और चतुष्कोणीय संघर्ष है।  अगर वँहा वँहा 6-8 प्रतिशत वोट बीजेपी के प्रति स्विंग होता है तो परिणाम बिलकुल चौक सकते है मेरे लिए अब उडीसा और बंगाल के चुनाव और अधिक दिलचस्प हो गए है शायद इस चुनाव की असली कहानी वंही बन रही है।

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