इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंसियल सर्विसेज (आईएलएंडएफएस ) मामले में नयी-नयी जानकारियां सामने आ रही है। सीरियस फ्रॉड इनवेस्टिगेशन ऑफिस( एसएफआईओ)  ने कहा है कि  आईएलएंडएफएस में हो रही गड़बड़ी को पहले पकड़ा जाना चाहिए था।  आरबीआई  को जिम्मेदार बताते हुए उसने कहा है कि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया  ने  आईएलएंडएफएस   की ओर से एक्सपोजर नॉर्म्स का पालन न करने की जानकारी 2015 में अपनी रिपोर्ट में दी थी।’ इस अवधि में कोई पेनल्टी नहीं लगाई गई और  आईएलएंडएफएस   की सब्सिडियरी आईएलएंडएफएस   फाइनैंशल सर्विसेज  को सुधार के उपाय किए बिना कामकाज जारी रखने की अनुमति दी गई। चार्जशीट के अनुसार, ‘नवंबर 2017 में ही गड़बड़ी का खुलासा हुआ था।

2015 में रिज़र्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन थे जो सितंबर, 2016 तक रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे। लेकिन आपको याद होगा कि संसदीय समिति को सौंपी एक रिपोर्ट में उन्होंने कहा था कि उन्होंने देश में हाई प्रोफाइल घोटालेबाजों की एक लिस्ट प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी थी। लेकिन उस पर क्या कार्रवाई हुई।  उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है उन्होंने उस वक्त कहा था कि “जब मैं गवर्नर था तब आरबीआई ने फ्रॉड मॉनिटरिंग का एक विभाग बनाया था ताकि छानबीन करने वाली एजेंसी को फ्रॉड केस की जानकारी उपलब्ध कराई जा सके। मैंने तब पीएमओ को हाई प्रोफाइल फ्रॉड केस की लिस्ट भेजी थी और उनमें से किसी एक या दो घोटालेबाज की गिरफ्तारी के लिए कॉर्डिनेशन की गुजारिश की थी। मुझे नहीं मालूम कि उस बारे में क्या प्रगति हुई है। यह ऐसा मामला है जिस पर तत्परता से कार्रवाई होनी चाहिए थी।”

लेकिन मोदी सरकार ने कोई कार्रवाई  नही की, यह साफ दिख रहा है।  इसलिए संकट की असली दोषी मोदीं सरकार ही है। राजन ने उस वक्त भी बताया था कि बैंकों ने जोंबी लोन को एनपीए में बदलने से बचाने के लिए ज्यादा लोन दिए।  अभी  जो रिपोर्ट सामने आई है उसमें भी कुछ ऐसी ही बाते कही गयी है।   एसएफआईओ  ने अपनी जांच में आरबीआई  की परीक्षण रिपोर्ट का इस्तेमाल किया था। जिसमें कहा गया कि आरबीआई ने बॉरोअर्स और ग्रुप कंपनियों को कर्ज देने पर ऐतराज जताया था। उसने कहा था कि यह आरबीआई ऐक्ट का उल्लंघन है। उसने कहा था कि शिवा ग्रुप को ओसीडी के बदले दिए गए 190 करोड़ रुपये का इस्तेमाल पिछले कर्ज की एवरग्रीनिंग के लिए किया गया था।

साफ बात यह है कि आरबीआई ने तो अपनी भूमिका ठीक तरह से निभाई।  लेकिन मोदी सरकार ने लोन डुबो चुके उद्योगपतियों को ओर लोन दिलवाना जारी रखे जिससे आज बाजार में कैश क्रंच जैसे हालात नजर आ रहे हैं और देश आर्थिक मंदी के हालात झेल रहा है।

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