साहित्यिक, मानवीय सरोकारों के प्रति पूर्ण प्रतिबद्ध कृष्णा सोबती में अंतिम समय तक सही के पक्ष में खड़े होने और हर गलत का सक्रिय विरोध करने का हौंसला था। जब कहीं, जहाँ कहीं नागरिक अधिकारों का हनन होता दिखा उन्होंने तत्काल और प्रचंड विरोध किया। खुद्दार शख्सियत वाली कृष्णा सोबती लेखन में ही नहीं जीवन का, व्यक्तित्व का भी एक नया व्याकरण रचती रहीं। एक ऐसा व्याकरण जिसमें से होकर आकार लेते समय की शख्सियत ऐसी मजबूत और निराली होती कि न स्त्री होना बाधक बन सकता था, न भाषा सीमित कर सकती थी, न सत्ता नीचा दिखा सकती थी।