भारत को टुकड़े-टुकड़े करने का काम कौन कर रहा है?

अंग्रेज़ों के विभेदकारी विभाजक राजशैली के अन्याय से हिंदू-मुसलमान दोनों ने मिलकर लडाई लड़ी और दोनों की एकता से ही हमें आजादी मिली। इस लड़ाई में कट्टर हिंदू व कट्टर मुसलमान दोनों ही शामिल न हुये लेकिन हर धर्म का सामान्य जन भागीदार रहा। आजादी मिलने के समय ही ये दोनों धार्मिक कट्टरपंथी पुन: अपने विभाजक व्यवहार से भारत को तोड़ने में जुट गये नतीजतन बडे पैमाने पर हिंसा मारकाट बेदख़ली आगज़नी शुरु की गई जिसके दबाब में विखंडित आजादी को स्वीकार करना पडा। इस विखंडन-विभाजन के शीर्ष पर जिन्ना जैसे मुसलमान नेता उनके संगठन तथा कट्टर हिंदुओं के संगठन और उनके नेता शामिल रहे जिसकी परिणति गांधी जी की हत्या में हुई। आज फिर खान-पान, भूषा, पूजापद्धति, तीज त्यौहार की संस्कृति, भाषा आदि के फ़ालतू सवाल उठाकर राष्ट्र को तोड़ने का काम शुरु हो चुका है। यही असली टुकड़े टुकड़े गैंग है, वे नहीं जिन पर कोई अप्रमाणित वीडियो चिपकाया गया है लेकिन बगैर सुबूत के!

भारत ने इससे बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के नेता उरी और बालाकोट की सर्जिकल स्ट्राइक को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना चुके हैं। यह प्रचार किया जा रहा है कि इसतरह की कार्रवाई करने का फैसला सिर्फ वे ही ले सकते हैं और देश का कोई प्रधानमंत्री ऐसा नहीं कर पाया। सच्चाई ठीक इसके विपरीत है । नेहरू, लालबहादुर शास्त्री और इंदिरा गाँधी ने इससे बड़ी स्ट्राइक की, लेकिन उन्होंने इसे राजनीति का मुद्दा नहीं बनाया।