दूसरे भी नहीं बच पायेंगे बहुत देर तक !

करीब 30 साल पुराने, हिरासत में मौत के जिस मामले में जामनगर के सत्र न्यायाधीश डी.एन.व्यास ने 20 जून को संजीव भट्ट को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, उसमें राज्य सरकार की सी.आई.डी. उन्हें और अन्य अफसरों को क्लीन चिट दे चुकी थी और सी.आई.डी. की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करने से एक मजिस्ट्रेट के इंकार के बाद प्रदेश सरकार ने सत्र अदालत में एक समीक्षा याचिका भी दायर की थी। इस बीच, प्रभुदास वैश्नानी की मौत के मामले में भट्ट और अन्य के खिलाफ आरोप वापस लेने की उसकी अपील 1996 से लंबित थी और इनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति देने से सरकार मना कर चुकी थी।

ये कहाँ ले आये चुनाव आयोग को ?

इस बार के लोकसभा चुनाव में चुनाव आयोग की भूमिका पूरी तरह संदेह के घेरे में रही। मतदान की तिथियों की घोषणा से लेकर आचार संहिता लागू करने को लेकर उसने जो फैसले लिए, वे सभी विवादों में रहे। वरिष्ठ पत्रकार राजेश कुमार ने टी एन शेषण से लेकर आयोग के नेतृत्व की समीक्षा खुले पत्र के माध्यम से की है।-सम्पादक मंडल