इस बार के लोकसभा चुनाव में चुनाव आयोग की भूमिका पूरी तरह संदेह के घेरे में रही। मतदान की तिथियों की घोषणा से लेकर आचार संहिता लागू करने को लेकर उसने जो फैसले लिए, वे सभी विवादों में रहे। वरिष्ठ पत्रकार राजेश कुमार ने टी एन शेषण से लेकर आयोग के नेतृत्व की समीक्षा खुले पत्र के माध्यम से की है।-सम्पादक मंडल