प्रधानमंत्री के नाम खुला पत्र!

हवाई जहाज तब तक बंद नहीं किये गए जब तक आपका मध्यप्रदेश ऑपरेशन  हो नहीं गया . इसलिए कि आपको विधायकों की हवाई ढुलाई करवानी थी . डाक्टरों केलिए तालियां और घंटे बजा कर आप के लोग वैज्ञानिकों और चिकित्सकों  की हौसला -आफजाई नहीं  करा रहे थे ,वे मनोरंजन और एक भावी करवाई का जश्न मना  रहे थे . अगले रोज आपका फ़ौज -फाटा एक तरफ दिल्ली के  शाहीनबाग को उजाड़ कर उनके इश्तेहार मिटा रहा था तो दूसरी तरफ  आपके उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री रामलला की मूर्तियां  ‘ वाजिब ‘ जगह पर रखवा  रहे थे . मध्यप्रदेश में राजतिलक का जश्न मनाने में कर्फ्यू बाधक नहीं बना ,लेकिन लाखों दिहाड़ी मजदूर और आमजन पुलिसिया ज़ुल्म केशिकार हुए . प्रधानमंत्रीजी हमने तो अपने को काबू में किया ,लेकिन आप तो दूध का शाइन -बोर्ड  लगाकर ताड़ी बेचते रहे . कौन है देशभक्त  और  कौन है देशद्रोही ? आप ही बताइये  .

रेणु को फिर से खोजना होगा

चार मार्च देश के मशहूर कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु का जन्मदिन है। इस अवसर पर पेश है बिहार के वरिष्ठ साहित्यकार और राजनीतिकर्मी प्रेमकुमार मणि के संस्मरण।
” उन पर मैंने और बहुतों ने बहुत बार लिखा है ,लेकिन उन पर और लिखा जायेगा ,लगातार लिखा जाता रहेगा ,क्योंकि वह कुछ खास थे। उनकी खासियत की चर्चा बहुतों ने की है। बहुतों ने अपने -अपने नजरिये से उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को देखने -दिखाने की कोशिश की है। लेकिन अभी भी बहुत कुछ ऐसा है ,जिसका अनावरण नहीं हुआ है। आने वाली पीढ़ियां शायद इसका अन्वेषण करेगी।”