नोटबंदी अमेरिकी कम्पनियों के फायदे के लिए थी ?

जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है, वह अमरीकी दबाव के आगे घुटने टेकती रही है और अमरीकी कॉर्पोरेशन्स को लाभान्वित करने वाली नीतियों पर अमल करती रही है। नोटबंदी का अभियान अमरीकी कॉर्पोरेट हितों के समक्ष समर्पण का ही एक और कदम था। अक्टूबर २०१६ में यूएसएड और भारत के वित्त मंत्रालय के बीच एक समझौता हुआ था जिसका नाम है कैटालिस्ट: इंक्लूसिव कैशलेस पेमेंट पार्टनरशिप इसका लक्ष्य था भारत में नगदीविहीन भुगतान में जबरदस्त बढ़ोतरी करना। यह साझेदारी यूएसएड द्वारा २०१५ में कराए गए और जनवरी २०१६ में प्रस्तुत एक अध्ययन की रिपोर्ट पर आधारित है। इस रिपोर्ट का शीर्षक: बियॉण्ड कैश (नगद से आगे)। इस रिपोर्ट और उसके बाद की योजनाओं को गुप्त रखा गया। इससे प्रधान मंत्री का वक्तव्य, कि नोटबंदी की तैयारियां कई महीनों से चल रही थीं , का वास्तविक अर्थ समझ में आ जाता है।

मोदी सरकार ने अमीरों को लाखों करोड़ दे डाला

सरकार न केवल धनी वर्ग को बहुत अधिक कर छूट प्रदान कर रही है, अधिकांश कर उगाही आम लोगों से कर रही है। इस तथ्य को समझने के लिए सरकार की कर संरचना को समझना आवश्यक है। दो प्रकार के कर लगाए जाते हैं, प्रत्यक्ष कर एवं अप्रत्यक्ष कर। प्रत्यक्ष कर आय पर लगाए जाते हैं, जैसे कि वेतन, लाभ, संपत्ति आदि पर, और इनका अधिकांश बोझ धनाढ्य वर्ग पर पड़ता है; जबकि अप्रत्यक्ष कर वस्तुओं और निर्व्यक्तिक सेवाओं पर लगाए जाते हैं और इनका बोझ गरीब और अमीर दोनों पर पड़ता है।

मोदी सरकार के चार साल और विकास दर में वृद्धि का सच

देश की अर्थव्यवस्था के बारे में मोदी सरकार की ओर से जारी आंकड़ों को के बाद से विकास दर को लेकर यह बहस तेज है कि मनमोहन सरकार ने देश का बेहतर आर्थिक विकास किया या मोदी सरकार। सरकार अब आंकड़ों को ही अस्थायी बता रही है। सच्चाई यह है कि पहले दो वर्षों के दौरान सरकार ने जीडीपी आकलन की प्रणाली में दो बार संशोधन किए, ताकि संवृद्धि दर को 7% से ऊपर दिखाया जा सके। इसके बावजूद 2016 के बाद से जीडीपी संवृद्धि दर में पुनः गिरावट आनी शुरू हो गई। लगातार छह तिमाहियों तक इसमें निरंतर गिरावट आई, 2016 की पहली तिमाही में यह 9.2% थी जो गिरते-गिरते 2017 की दूसरी तिमाही तक 5.7% तक आ गई। अब सरकार दावा कर रही है कि अर्थव्यवस्था में पुनः सुधार आना शुरू हो गया है, 2017 की तीसरी तिमाही में इसमें 6.3% की वृद्धि हुई और भविष्य में इसमें और अधिक वृद्धि होने की संभावना है। वास्तविकता यह है कि विकास में पुनरुद्धार का यह दावा अधूरे आंकड़ों पर आधारित है।