अब बिजली गिरेगी बिजली उपभोक्ताओं पर !

हर घर मे बिजली पुहचाने के नाम पर, स्मार्ट मीटर लगाने के नाम पर, बेहतर टैरिफ नीति के नाम पर मोदी सरकार अगले कुछ महीनों में एनटीपीसी पॉवरग्रिड  के जरिए घाटे में चल रही डिस्कॉम यानी बिजली वितरण कंपनियों को टेकओवर कर सकती है। सरकार जो नयी पावर टैरिफ नीति ला रही है,उसे अच्छी तरह से समझना बहुत जरूरी है. इसके तहत बिजली इस्तेमाल को लेकर दिन में तीन तरह के पावर टैरिफ हो सकते हैं। ग्रहकों  को सुबह, दोपहर और शाम के लिए अलग-अलग टैरिफ (स्लैब) के मुताबिक बिजली बिल भरना पड़ सकता है।

राकेश अस्थाना को बचाने में क्यों लगी है सरकार ?

मोदी सरकार ने राकेश अस्थाना के खिलाफ जांच की निगरानी करने वाले अफसर तरुण गौबा का तबादला कर दिया है।  बुधवार को सीबीआई ने इसे लेकर एक आदेश जारी किया।  इस आदेश में कहा गया है कि कैबिनेट की नियुक्ति समिति तरुण गौबा को समय से पहले ही उनके राज्य कैडर में वापस भेजने को मंजूरी देती है। तरुण गौबा गुजरात की फार्मा कंपनी स्टर्लिंग बायोटेक लिमिटेड के निदेशक संदेसरा बंधुओं और राकेश अस्थाना के सबंन्धो की ही तो जांच कर रहे थे जिसमे अभी कुछ दिन पहले ही पता चला है कि स्टर्लिंग बायोटेक ने पीएनबी घोटाले से भी ज्यादा की रकम की चपत लगाई है। 

क्या जीएसटी का घाटा बिगाड़ेगा भारत का बजट?

दरअसल जीएसटी अब सरकार का सबसे बड़ा सिर दर्द साबित हो रहा है।  जीएसटी लागू होने के बाद राज्य का राजस्व घाटा बढ़कर 20 से 32 प्रतिशत पर पहुंच गया है। केंद्र ने इस नई व्यवस्था से राज्यों को होने वाले घाटे की भरपाई की जिम्मेदारी ली है । घाटा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। जीएसटी की इस दोषपूर्ण व्यवस्था से केंद्र सरकार का भी खजाना खाली हो चुका है।  प्रश्न उठता है कि क्या मोदी सरकार इस बजट में नए कर लगाने का फैसला कर सकती है?

बीएसएनएल को क्यों डुबो रही है सरकार ?

बीएसएनएल जैसी प्रतिष्ठित सरकारी कंपनी के कर्मचारियों का शायद जून महीने का वेतन न मिल पाए। यदि यह बड़ा लाभ कमाने वाली कम्पनी थी तो पिछले 2 सालों में अचानक ऐसी कौन सी आपात स्थिति आ गयी कि इतनी बड़ी कम्पनी को अपने कर्मचारियों को तनख्वाह देने के लाले पड़ गए हैं? दो साल पहले तक लाभ कमाने वाली कंपनी को सरकार ने बुरी हालत में पहुंचा दिया।
अपने मित्र पूंजीपति की एक कंपनी को फायदा पुहचाने के लिए लाखों कर्मचारियों के परिवारों को दर दर की ठोकर खाने पर मजबूर किया जा रहा है।

योग दिवस मनाएं या दिमागी बुखार से लड़ें ?

देश का प्रधानमंत्री एक क्रिकेट खिलाड़ी के अंगूठे के फ़्रैक्चर पर ट्वीट कर अपनी चिंता जता रहा है , लेकिन अभी तक उन्होंने एक शब्द भी इन बच्चों की अकाल मृत्यु पर नही कहा! यह किस किस्म की संवेदनशीलता है ? चुनावी रैलियों में देश के कोने कोने में जाना वाला प्रधानमंत्री को मुजफ्फरपुर जाने का बिल्कुल भी समय नहीं है।

दाल का आयात और अडानी का कुचक्र !

मोदी सरकार ने 2016 में मोजाम्बिक से एक समझौता किया है। इसमें अगले पांच सालो के लिए मोजाम्बिक से तुअर और अन्य दालों का आयात दोगुना कर दो लाख टन प्रतिवर्ष करने को मंजूरी दी गयी थी। .यानी यहाँ उत्पादन कम हो या ज्यादा हो हमें दाल मोजाम्बिक से ही खरीदनी होगी। अफ्रीका से आयात होने वाली सारी दाल अडानी के ही पोर्ट पर उतरेगी ओर उसके भंडारण की व्यवस्था भी वही होगी। यानी पोर्ट पर कितनी भी दाल जमा हो सकती है। पोर्ट का विशेष दर्जा होने की वजह से चेकिंग होना भी मुश्किल है।

गिरीश कर्नाड: अभिव्यक्ति की सार्थक यात्रा

गिरीश ने कन्नड़ भाषा में अपनी रचनाएं लिखीं। जिस समय उन्होंने कन्नड़ में लिखना शुरू किया, उस समय कन्नड़ लेखकों पर पश्चिमी साहित्यिक पुनर्जागरण का गहरा प्रभाव था। लेखकों के बीच किसी ऐसी चीज़ के बारे में लिखने की होड़ थी जो स्थानीय लोगों के लिए बिल्कुल नयी थी। इसी समय कर्नाड ने ऐतिहासिक तथा पौराणिक पात्रों से तत्कालीन व्यवस्था को दर्शाने का तरीका अपनाया तथा काफ़ी लोकप्रिय हुए।

बाज़ार में नकदी नहीं, अर्थव्यवस्था में मंदी !

मोदी सरकार ने लोन डुबो चुके उद्योगपतियों को ओर लोन दिलवाना जारी रखा जिससे आज बाजार में कैश क्रंच जैसे हालात नजर आ रहे हैं और देश आर्थिक मंदी के हालात झेल रहा है। 2015 में रिज़र्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने संसदीय समिति को सौंपी एक रिपोर्ट में कहा था कि उन्होंने देश में हाई प्रोफाइल घोटालेबाजों की एक लिस्ट प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी थी। लेकिन मोदी सरकार ने कोई कार्रवाई नही की, यह साफ दिख रहा है। इसलिए संकट की असली दोषी मोदीं सरकार ही है।

भारत अब दुनिया में सबसे ज्यादा बेरोजगारों वाला देश है!

2017-18 में बेरोजगारी दर ग्रामीण क्षेत्रों में 5.3% और शहरी क्षेत्र में सबसे ज्यादा 7.8% रही। पुरुषों की बेरोजगारी दर 6.2% जबकि महिलाओं की 5.7% रही। इनमें नौजवान बेरोजगार सबसे ज्यादा थे, जिनकी संख्या 13% से 27% थी।  लेकिन उन्हें सस्ता डाटा ओर हिंदुत्व ओर अन्धे राष्ट्रवाद की चरस की सप्लाई बदस्तूर जारी थी तो नोकरियो की किसे परवाह थी।  लेकिन आप यह स्थिति बहुत देर तक बनाए नही रख सकते। कभी न कभी तो डोज का असर खत्म हो जाता है और हकीकत की दुनिया मे लौटना पड़ता है। 

रिटेल व्यापार पर कब्जे का युद्ध तेज हुआ!

शिरोमणि अकाली दल की सांसद और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल को वॉलमार्ट के सीईओ का ट्विटर पर बधाई संदेश मिला तो आरएसएस का संगठन स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) नाराज़ हो गया। वॉलमार्ट की ओर से बधाई तो बनती ही थी क्योंकि हरसिमरत ने मंत्रिमंडल में रहते फ़ूड प्रोसेसिंग सेक्टर में वॉलमार्ट के लिए एफडीआई का रास्ता आसान किया। वॉलमार्ट ने फ्लिपकार्ट को खरीद लिया है और उसी के जरिये फ़ूड रिटेल में उतरने वाली है क्योंकि भारत के रिटेल सेक्टर में एफडीआई की मंजूरी नहीं है। फ़ूड रिटेल में सौ प्रतिशत एफडीआई की मंजूरी है। देश के ४२ लाख करोड़ रूपये के खुदरा व्यापार में सात करोड़ व्यापारी लगे हैं। इस पर कब्ज़ा ज़माने के लिए वॉलमार्ट, अमेजन और पेटीएम में युद्ध चल रहा है। अब अम्बानी की रिलायंस भी मैदान में कूद रही है। मोदी सरकार इस खेल को चलाने के लिए कृत संकल्प है।