इतनी भीषण आर्थिक तबाही के बाद भी सरकार का घमंड बरकरार

दूसरी तिमाही का रिजल्ट आ गया है. इस बार भी जीडीपी की ग्रोथ 4.5 प्रतिशत की रही है. जब नोटबन्दी कि गयी तब ही पूर्व प्रधानमंत्री एवं विश्व में मान्यता प्राप्त अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह ने इसे संगठित लूट और सुनियोजित कानूनी दुरूपयोग बताते हुये दो प्रतिशत कमी आने की आशंका जीडीपी के लिये बता दी थी और यह बात कालांतर में बिल्कुल सच साबित हुई. पिछले साल देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे अरविंद सुब्रमण्यम ने भी साफ साफ कह दिया था कि नोटबंदी का फैसला देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित होगा.

रिजर्व बैंक को भी दिवालिया बनाने पर आमादा है सरकार

मोदी सरकार का मन रिजर्व बैंक के 1 लाख 76 हजार करोड़ हड़पने से भी नहीं भरा है. अब वह चाह रही है कि रिजर्व बैंक एक स्ट्रेस एसेट फंड (Stress Asset Fund) स्कीम लेकर के आए जिसके जरिए बैंकों पर बढ़ते फंसे कर्ज यानी नॉन-परफॉर्मिंग एसेट का भार कम हो जाए. इसी के चलते वित्त मंत्रालय देश के 25 बैंकों के NPA को खरीदने के लिए आरबीआई पर दबाव बना रहा है.

देश में बेरोजगारी दर तीन साल के उच्चतम स्तर पर

भारत की बेरोजगारी दर अक्तूबर माह में तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। सेंटर फॉर मॉनिटरिग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) द्बारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले महीने बेरोजगारी दर 8.5 फीसदी रही, जो कि अगस्त 2016 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। आर्थिक मंदी के कारण देश के ग्रामीण और शहरी इलाकों में बेरोजगारी लगातार बढ रही है। ऑटो के अलावा टेक्सटाइल, चाय, एफएमसीजी, रियल एस्टेट जैसे सेक्टर में आई भीषण मंदी से हालात बद से बदतर हो रहे हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि सरकार यह बात मानने को तैयार ही नहीं है कि देश बुरी तरह आर्थिक मंदी की चपेट में है और बेरोजगारी लगातार बढ रही है।

भारत में पाकिस्तान से ज्यादा भुखमरी !

दिन रात हमारे न्यूज़ चैनल हिंदुस्तान पाकिस्तान करते रहते हैं ।  हर बात में पाकिस्तान से तुलना की जाती है ।  इसलिए आज हमारे लिए यह राष्ट्रीय शर्म का दिन है।   2016 की 118 देशों की सूची में भारत 97वें स्थान पर था और पकिस्तान 107 वें स्थान पर था जबकि आज 2019 के इस ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत 5 स्थान और लुढ़क कर 102 वे नंबर पर जा पुहंचा है। जबकि पाकिस्तान गहरे आर्थिक संकट झेलने के बावजूद अपनी स्थिति सुधारते हुए 94वें स्थान पर पुहच गया है। 2019 की इस लिस्ट में भारत तो अन्य एशियाई देशो जैसे नेपाल(73), म्यांमार(69), श्रीलंका(66) और बांग्लादेश(88) से भी पीछे है।  भारत में अभी भी भूख एक गंभीर समस्या है।

एलआईसी  की जमापूंजी भी लुटने के कगार पर !

एलआईसी में देश की अधिकांश जनता की जमा-पूंजी है और वह प्रतिवर्ष अपनी बचत से हजारों-लाखों रुपये निकालकर एलआईसी की पॉलिसी में डालता है।  इस पैसे के सहारे उसका और उसके परिवार का भविष्य सुरक्षित रहता है।  मोदी राज में तो बहुत पहले से इस पैसे की लूट शुरू हो गयी थी,  पर अब तो पानी सर तक आ गया है।

रूस को एक अरब डॉलर के भारतीय कर्ज की असली कहानी!

प्रधानमंत्री रूस के दौरे पर है और वहाँ उन्होंने राष्ट्रपति पुतिन के सामने यह घोषणा कर दी कि भारत रूस को एक अरब डॉलर का कर्ज देने जा रहा है। आखिर यह कर्ज़ क्यो दिया जा रहा है? असलियत यह है कि एक अरब डॉलर तो कर्ज़ दिया जा रहा है। इसके अलावा भारतीय सरकारी कम्पनियों से मोदी ने पांच अरब डॉलर (करीब 35 हजार करोड़ रुपये) के 50 समझौते करवाए है जिसमे भारतीय कंपनियों द्वारा रूस के तेल और गैस सेक्टर में निवेश करवाया जा रहा है। दरअसल मोदी रुस का एक अहसान उतार रहे हैं।

देश के आर्थिक हालात सरकार के काबू से बाहर हुए

मोदी सरकार की गलत आर्थिक नीतियों और गलत फैसलों का परिणाम है कि आज देश की अर्थव्यवस्था के सामने इधर कुआं, उधर खाई जैसी स्थिति पैदा हो गई है। दो दिन पहले वित्तमंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि रिजर्व बैक ऑफ इंडिया से मिले फंड को कैसे खर्च किया जाएगा, इसका निर्णय अभी नही लिया गया है। लेकिन सब जानते है कि अंदर ही अंदर यह निर्णय बहुत पहले लिया जा चुका है कि इस बड़ी राशि को किस मद में लगाया जाएगा। इससे जीएसटी राजस्व मे होने वाली 1,500 अरब रुपये की कमी को भरने मे कुछ मदद मिलेगी, लेकिन कमजोर कर राजस्व के कारण सरकार के खजाने पर दबाव बना रहेगा। सरकार यदि जीएसटी की दरें कम करती है तो भी नुकसान है और बढाती है तो भी नुकसान है। जीएसटी अब ऐसा भंवर बन गया है कि जिससे निकल पाना अब असम्भव लग रहा है और यह सब मोदी सरकार की बिना सोचे समझे बेहद जल्दबाजी मे जीएसटी लागू कर देने का नतीजा है।

रिजर्व बैंक पर सरकार ने डाका डाला, 1.76 लाख करोड रुपए लूटे!

रिजर्व बैंक ने केंद्र सरकार को रेकॉर्ड 1.76 लाख करोड़ रुपए हस्तांतरित करने की मंजूरी दी है। कोई नही बता सकता कि आज से पहले कब इतनी बड़ी रकम सरकार को देने की अनुशंसा की गयी? यह साफ-साफ डाकेजनी हैं! यह रकम उस वक्त दी जा रही है जब रुपया एशिया की सबसे कमज़ोर मुद्रा बनता जा रहा है। उसकी कीमत कम होती जा रही है और विदेशी निवेशक तेजी से अपनी रकम भारतीय पूंजी बाजार से निकाल रहे हैं। यह एक अभूतपूर्व स्थिति है जब रिजर्व बैंक भी राजा का बाजा बजाने को मजबूर कर दिया गया है।

सरकारी सम्पति बेच कर खर्च चलाने की मजबूरी !

अब यह साफ साफ दिख रहा है कि आने वाले सालो में मोदी सरकार राष्ट्रीय संपत्ति माने जाने वाली बड़ी-बड़ी कंपनियों को बेच कर अपना खर्च चलाने की तैयारी कर रही है।  उसे इस बात से कोई मतलब नही रह गया है कि वह कंपनियां घाटे में है या मुनाफे में। सरकार इस वक्त ताबड़तोड़ ढंग से ट्रांसमिशन लाइनों, टेलिकॉम टावरों, गैस पाइपलाइनों, हवाई अड्डों और भूखंडों सहित सरकारी कंपनियों के कई ऐसेट्स बेचने या लीज पर देने की तैयारी कर रही है।

आरएसएस अब सैनिक स्कूल खोलेगा 

सैनिक  स्कूल के इस मॉडल की शुरुआत हिन्दू महासभा के नेता और आरएसएस  के संस्थापक केबी हेडगेवार के गुरु डॉ बीएस मुंजे ने १९३० के दशक में की थी।  उनका मॉडल इटली के तानाशाह और फासीवाद के जन्मदाता मुसोलिनी से प्रभावित था। उसने  अपने कार्यकर्ताओ को फासीवाद में प्रशिक्षित करने के लिए ऐसे ही संस्थान खोल रखे थे।