शेयर बाजार में भी बज रहा है मोदी सरकार का विदाई गीत!

देश के आर्थिक हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। देश मंदी के भंवर में फंस गया है, क्योंकि कई प्रमुख आर्थिक संकेतकों में गिरावट देखी गई है। लोकसभा चुनाव के लिए मतदान के पहले चरण से लेकर छठे चरण तक एक महीने के दौरान शेयर बाजार का बाजार का सूचकांक लगातार नीचे की ओर लुढकता गया है और निवेशकों को करीब दस लाख करोड रुपए का नुकसान हो चुका है। यानी माना जा रहा है कि शेयर बाजार भी मोदी सरकार की विदाई का नगमा गुनगुना रहा है।

क्या भाजपा फर्स्ट टाइम वोटर्स को बहका चुकी है ?

2019 की 17वीं लोकसभा के गठन के लिए 90 करोड़ लोग वोट डालेंगे। इसमें 18 से 19 साल के डेढ़ करोड़ वोटर पहली बार हिस्सा लेंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त के मुताबिक आठ करोड़ 43 लाख नए मतदाता इस बार अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। हमें यह मान ही लेना चाहिए कि बीजेपी का यह अभियान खासकर हिंदी हार्ट लेंड में फर्स्ट टाइम वोटर्स को बहकाने में कामयाब रहा है। उम्मीद अब सिर्फ बचे हुए मतदाताओं से ही है।

अबकी बार, किसकी सरकार ?

दिल्ली की गद्दी पर कौन बैठेगा, यह एक बार फिर उत्तर प्रदेश ही तय करने जा रहा है। वही तस्वीर उभर रही है जिसे हंग पार्लियामेंट कहा जा रहा है। क्षेत्रीय दल की सीटें बढ़ने के आसार हैं। वे अपनी बढ़ी हुई सीटों की बदौलत यूपीए के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं।

क्या मोदी जानबूझ कर झूठ फैलाते हैं ?

क्या कभी आप सोचते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी अज्ञानता से भरी हुई बाते क्यों करते हैं ? आखिर ऐसे झूठे तथ्य रखने से एक प्रधानमंत्री को हासिल क्या होता है? प्रधानमंत्री को क्या बोलना है, किस बारे में भाषण देना है, उनके भाषणों के पीछे एक पूरी रिसर्च टीम की मेहनत होती है और वह गलत तथ्य नहीं बता सकती। सच यह है कि इस तरह के झूठ जानबूझकर बोले जाते हैं ताकि जनता के मूल मुद्दे पब्लिक डिस्कशन से बाहर हो जाएं। जिस देश का प्रधानमंत्री खुद फेक न्यूज़ सर्कुलेट करने का सबसे बड़ा माध्यम बन जाए , उस देश के लोकतंत्र के क्या हाल होंगे ? नतीजा यह होता है कि जनता के मूल मुद्दे पब्लिक डिस्कशन से बाहर हो जाते हैं।

मसूद अज़हर को आतंकी घोषित कराने का महंगा सौदा !

मसूद अज़हर को चुनाव खत्म होने के पहले आतंकी घोषित कराने के फेर में मोदी सरकार ने देश का बड़ा नुकसान कर दिया है। भारत सरकार ने दस साल पहले उसे आतंकी घोषित करने का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र संघ में रखा था, लेकिन चीन इसे रोक रहा था। पुलवामा हमले के बाद भारत ने फिर यह कोशिश की तो उसने इस पर तकनीकी रोक लगा दी। अबकी बार उसने इसे हटा लिया और अमेरिका तथा फ्रांस के प्रस्ताव को पारित होने दिया क्योंकि उस पर इन दोनों देशों का दबाव था। दरअसल, ईरान से हमारे देश को हो रहे सस्ते तेल के आयात को अमेरिका रोकना और ईरान से हमारे संबंधों को ध्वस्त करना चाहता है। इसमें वह सफल रहा। मनमोहन सिंह ने इसे लेकर कोई सौदा नहीं किया और अपनी ताकत पर इसे कराने की कोशिश करते रहे।

क्या चुनाव के आंकड़ों में हेराफेरी हो सकती है?

एक डाटा विशेषज्ञ ने चुनाव आयोग के २९ अप्रैल के मतदान के आंकड़ों में विसगतियां पायी है। मतदान के आंकड़े रियल टाइम में देने वाले इसके एप्प के आंकड़े ३० अप्रैल को बदल गए। ये बदलाव सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल और ओडिसा में दिखाई दे रहे हैं। डाटा विशेषज्ञ को आशंका है। भाजपा की नज़र इन दो राज्यों पर है जहाँ वह सबसे कमजोर स्थिति में है। उनकी आशंका है कि चुनाव आयोग यह घोटाला कर सकता है।

इस बार मोदी सपने नहीं बेच सकते !

मोदी अब भी सबसे बड़े नेता हैं, लेकिन 2014 जैसे नहीं।  उस वक्त वो सपने बेच रहे थे। इस बार हकीकत की पथरीली ज़मीन पर खड़े हैं। लोग उनसे पूछ रहे हैं कि उन्होंने 5 सालो में क्या किया और दिखाने के लिए उनके बही-खाते में कुछ खास नहीं है, जबकि राहुल अब 2014 जैसे नेता नहीं हैं।  अब वह पप्पू की छवि से बहुत आगे निकल आए हैं।  राहुल अब मोदी को टक्कर देने वाले नेताओं की कतार में सबसे आगे हैं। यदि कांग्रेस समेत दूसरे दल इन विधानसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं तो यह माना जाना चाहिए कि उनकी सीटों की संख्या इस लोकसभा चुनाव में बढ़ रही है जिसका सीधा नुकसान भाजपा को हो रहा है।

प्रज्ञा की उम्मीदवारी: ध्रुवीकरण की खुली घोषणा

प्रज्ञा ठाकुर अजमेर बम धमाकों के आरोप से तो बरी हो गई , लेकिन मालेगांव केस उस पर आज भी चल रहा है । कैंसर की बीमारी के इलाज का आधार पर उन्हें कोर्ट ने ज़मानत दी थी । लेकिन वह बाहर आकर बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रही है ।

अब डाक विभाग बेचने की तैयारी ?

खबर आयी है कि ‘सरकारी कम्पनी इंडिया पोस्ट घाटे में’। असलियत में यह कोई कम्पनी नही है। यह भारतीय डाक विभाग का ब्रांड नेम है ओर जिसे कम्पनी का घाटा बताया जा रहा है, वह दरअसल भारतीय डाक विभाग का घाटा है। इन ख़बरों का अर्थ है कि लोग सरकारी विभागों के खिलाफ हो जाएँ और इनके निजीकरण का पक्ष लें। यदि मोदी जी चाहते तो एक झटके में इसे फायदे में ला सकते थे ,यदि वह डिजिटल पेमेंट की कमान इस विभाग के हाथों में दे देते। लेकिन उन्हें तो पेटीएम का फायदा करवाना था! उन्हें जियो मनी के साथ स्टेट बैंक की पार्टनर शिप करवानी थी।

मोदीराज में “पिंक रिवोल्युशन’

मोदी 2014 में जीत गए।  2014 -15 में बीफ एक्सपोर्ट बिलकुल टॉप पर है।   अगले तीन सालो 2015 -16 , 2016-17 , 2017 -18 में यह मात्रा मामूली सी ही कम होती है। केंद्र में भाजपा सरकार के बनने के बाद से देश भर में गाय, गोमांस और मांसाहार को लेकर घमासान मच जाता है।  कई लोगों को गोमांस का सेवन करने, लाने, ले जाने या गाय को काटने के लिए ले जाने के शक में पीट पीट कर मार दिया गया।  मोब लिंचिंग की दर्जनों घटनाओं में सेकड़ो लोग घायल होते है या मार दिए जाते है, पर बीफ एक्सपोर्ट बदस्तूर जारी है।