यूरोपीय सांसदों को कश्मीर का दौरा करने की इजाजत क्यों?

यूरोपीय संसद का एक प्रतिनिधिमंडल 29 अक्टूबर को कश्मीर घाटी का दौरा करेगा। सवाल है कि अगर कश्मीर भारत का अंदरुनी मामला है तो फिर यूरोपीय सांसदों को वहां का दौरा करने की इजाजत क्यों दी जा रही है? क्या यूरोपीय सांसद वहां पर्यटक की हैसियत से डल झील में शिकारे पर बैठकर सैर करने जा रहे हैं?

कश्मीर में गिरफ्तार राजनीतिक कार्यकर्ताओं की सशर्त रिहाई

जम्मू-कश्मीर में गिरफ्तार राजनीतिक कार्यकर्ताओं की रिहाई का सिलसिला शुरू हुआ है। रिहाई के लिए हर कार्यकर्ता को एक बॉन्ड पर दस्तखत करना जरुरी है, जिस पर उसे यह लिखा होता है कि वह एक साल तक अनुच्छेद 370 पर केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ न तो कुछ बोलेंगे और न ही सरकार विरोधी किसी राजनीतिक गतिविधि में शामिल होंगे।

गांधीवादी कार्यकर्ता कुमार प्रशांत के खिलाफ एफआईआर

गांधीवादी कार्यकर्ता और जाने-माने पत्रकार कुमार प्रशांत के खिलाफ आरएसएस के कार्यकर्ताओं देश के खिलाफ षड़यंत्र करने का एफआईआर दर्ज़ कराया है क्योंकि उन्होंने सावरकर के अंग्रेज़ों से सहयोग करने और स्वतंत्रता आंदोलन से आरएसएस के दूर रहने की बात अपने भाषण में कही। जयप्रकाश नारायण के सहयोगी रहे कुमार प्रशांत गाँधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष हैं।

संविधान और देश की एकता के लिए लड़ेंगे समाजवादी

समाजवादियों के राष्ट्रीय समागम ने संविधान और देश की एकता बचाने के लिए सघर्ष शुरू  करने का फैसला किया किया है।  उन्होंने बिना किसी का नाम लिए समाजवाद के नाम पर  परिवारवाद, जातिवाद और वंशवाद को बढ़ावा देने वाली  पार्टियों की आलोचना की।  गाँधी शांति प्रतिष्ठान में जमा हुए समाजवादी बुद्धिजीवि, ट्रेड यूनियन नेता और राजनीतिक कार्यकर्ता  गाँधी, लोहिया, जेपी और आचार्य नरेन्द्रदेव के सिद्धांतों पर आधारित एक समाजवादी आंदोलन की रूपरेखा बना रहे हैं ।  

अमेरिका की ‘टाइम’ मैगजीन ने मोदी को बताया ‘भारत का मुख्य विभाजनकारी’

अमेरिका की मशहूर और प्रतिष्ठित मैगजीन टाइम के नवीनतम मई अंक की कवर स्टोरी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर केंद्रित है। कवर पृष्ठ पर प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर है। लेकिन तस्वीर के साथ जो शीर्षक दिया गया है वह बेहद सनसनीखेज है और जिसे काफी हद तक यथार्थपरक भी माना जा रहा है। शीर्षक है ‘India’s Divider In Chief’ (डिवाइडर इन चीफ) यानी ‘भारत का मुख्य विभाजनकारी’।

यौन-उत्पीड़नः संदेहमुक्त न्याय की तलाश !

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत पर सुनवाई की प्रक्रिया को लेकर विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। कोर्ट की एक बेंच इसकी तह जाने में लगा है कि इस शिकायत के जरिए मुख्य न्यायाधीश को बदनाम करने की साजिश के पीछे कैान लोग हैं। दूसरी ओर, एक कमेटी इस शिकायत की सच्चाई जांचने में लगी है। लेकिन दोनों प्रक्रियाओं पर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। संस्थाओं के विनाश के काल में सुप्रीम कोर्ट अपनी साख बचाने के लिए बेचैन है।

अब सुप्रीेेम कोर्ट का राजनीतिकरण !

वित्त मंत्री जेटली ही नहीं, पूरी सरकार सुप्रीम कोर्ट के राजनीतिकरण में लगी है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई के खिलाफ हुई यौन उत्पीड़न की शिकायत पर विशेष बेंच की सुनवाई को लेकर उठे विवाद ने उसे इसका मौका दे दिया है। नौकरशाही, आरबीआई चुनाव आयोग और सेना के बाद वह सुप्रीम कोर्ट के राजनीतिक इस्तेमाल में लग गई है।

मालेगांव बम कांड की आरोपी प्रज्ञा करेगी दिग्विजय का मुकाबला

भोपाल लोकसभा सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार दिग्विजय सिंह के मुकाबले शिवराज सिंह और उमा भारती समेत भाजपा का कोई भी सूरमा उम्मीदवार बनने को राजी नहीं हुआ तो पार्टी ने आनन-फानन में साध्वी कहलाने वाली प्रज्ञा ठाकुर को अपना उम्मीदवार बना दिया। संदिग्ध आतंकवादी के तौर पर लंबे समय तक जेल में रही प्रज्ञा ठाकुर को उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के जरिए मैदान मारने का मंसूबा बांधा है।

प्रधानमंत्री के वीभत्स ठहाके की खबर को सिर्फ टेलीग्राफ ने छापने की हिम्मत दिखाई

रविवार को एक कार्यक्रम डिस्लेक्सिया पीडितों की बेबसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीभत्स ठहाके की खबर को मुख्यधारा के मीडिया ने सिरे से नजरअंदाज कर एक बार फिर अपने बिकाऊ होने का परिचय दिया। सिर्फ टेलीग्राफ ने यह खबर अपने पहले पन्ने पर छापने की हिम्मत दिखाई। सोशल मीडिया पर भी इस वाकये को लेकर प्रधानमंत्री की तरह-तरह से निंदा हुई।

मोदी सरकार की कूटनीति का यह कैसा डंका बज रहा है?

पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में भारत को सबसे ज्यादा निराश चीन ने किया है। उसने पहले तो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पुलवामा हमले की निंदा का प्रस्ताव एक हफ्ते तक पास नहीं होने दिया। फिर प्रस्ताव पास हुआ तो उसमें पाकिस्तान का जिक्र नहीं होने दिया। जाहिर है कि ऐसा करके उसने साफ तौर संकेत दिया है कि वह इस मौके पर पाकिस्तान के साथ खडा हुआ है। दो दिन पहले सऊ दी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ने भी प्रधानमंत्री मोदी के साथ साझा वक्तव्य में पुलवामा हमले की निंदा तो की है लेकिन पूरे बयान में पाकिस्तान का कहीं जिक्र नहीं है। इसके अलावा और भी कई देश इस मसले पर पाकिस्तान का नाम लेने से बचते दिखे हैं।