भगत सिंह और उनके साथियों ने ब्रिटिश सरकार से कहा कि उनके साथ राजनीतिक बंदी जैसा ही व्यवहार किया जाए और फांसी देने की जगह गोलियों से भून दिया जाए. जबकि हिंदू राष्ट्रवादी सावरकर ने अपील की कि उन्हें छोड़ दिया जाए तो आजीवन क्रांति से किनारा कर लेंगे. यहां प्रस्तुत है भगत सिंह और सावरकर द्वारा जेल में रहते हुए अंग्रेज सरकार को भेजी गई याचिकाएं, जो दोनों के व्यक्तित्व और चरित्र का दिग्दर्शन कराती हैं।