बाबा अलाउद्दीन खां साहब की बेटी अन्नपूर्णा जी का पिछले शनिवार को निधन  हो गया। अन्नपूर्णा जी कमाल की संगीतज्ञ थीं । वे खां साहब की पटु शिष्या थीं। खां साहब ने संगीत का  अनुपम खजाना उन्हें सौंपा था। वे सच्चे अर्थों में साधिका थीं। प्रसिद्ध सितारवादक रविशंकर जी से उनका विवाह हुआ था। विवाह के बाद रविशंकर जी ने उनसे स्टेज पर अपनी प्रस्तुति न करने का एक तरह से आदेश दिया था, जिसे अन्नपूर्णा जी ने स्वीकार कर लिया ।  बाद में रविशंकर जी से  उनका संबंध विच्छेद हो गया ,बावजूद इसके उन्होंने कभी स्टेज पर  अपने संगीत को प्रस्तुत नहीं किया । वे पिता की तरह बहुमुखी प्रतिभा की धनी थीं। प्रसिद्ध फिल्मकार ऋषिकेश मुख़र्जी ने उनके रिश्तों पर ‘ अभिमान’ नामक फिल्म बनाई जिसमे अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी प्रमुख भूमिकाओं में हैं।
विभिन्न वाद्ययंत्रों(सितार,सरोद और सुरबहार  के अलावा वे उच्चकोटि की गायिका भी थीं। कहते हैं बाबा जैसी उनमें प्रतिभा थी। बाबा भी उन्हें बड़ा   लाड़ करते थे। वे बाबा के संगीत की सच्ची वारिस थीं। बाबा ने उन्हें  न केवल अपनी संगीत विरासत  ही दी , अपितु अपनी उच्चकोटि की आध्यात्मिकता भी उन्हें सौंपी। वे सच्चे अर्थों में विदुषी व कलासाधिका थीं। प्रसिद्ध संगीत समीक्षक आदरणीय मदनलाल जी व्यास   ने उनके बारे में बहुत-सी बातें बताई थीं।  व्यास जी से उनका बड़ा पारिवारिक संबंध था। मदन लाल जी के छोटे सुपुत्र अन्नपूर्णा जी के शिष्य हैं। उन्होंने उनसे सरोद वादन की शिक्षा ली थी। प्रसिद्ध सितारवादक अरविंद पारिख भी उनके पटु शिष्य थे। अन्नपूर्णा जी बेहद शालीन, मृदु व अल्पभाषी विदुषी थीं। रविशंकर जी से उन्हें एक संतान भी हुई थी , जिसकी अकाल मृत्यु हो गई। संतान के बिछोह में वे भीतर से टूट गईं। इस सदमे से वे उबर नहीं पाईं ।  उनमें विरक्ति का भाव पैदा हो गया।   उन्होंने अपने को बाह्य जगत से काट लिया था। वैसे संगीत जगत में उनकी बड़ी प्रतिष्ठा थी। उन्होंने  अपनी कला को कभी व्यावसायिक नहीं होने दिया। संगीत की शिक्षा वे लोगों को देती रहीं उन्होंने न केवल लोगों को संगीत सिखाया अपितु संगीत के माध्यम से उच्च कोटि का मनुष्य भी बनाया। उन्होंने अपने शिष्यों में बाबा जैसी  गहरी आध्यात्मिकता  भी  संगीत के माध्यम से पैदा की। ऐसी महान संगीतज्ञ के निधन से संगीत जगत की अपूरणीय क्षति हुई है। उन्हें हमारी विनम्र श्रद्धांजलि।  

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