मोदी सरकार रॉफेल विमान को देश की सुरक्षा का मजबूत कवच बता रही है। लेकिन वह यह नहीं बता रही है कि इस कवच में ऐसा क्या ब्रह्मास्त्र छुपा हुआ है कि जहाज की कीमत 560 करोड से एकदम 1600 करोड रुपए कैसे हो गई। ऐसे अनेकानेक प्रश्न हैं, जिनके इस सरकार के पास कोई उत्तर नहीं हैं। रॉफेल की ही तरह यह सरकार अपने विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर के मामले में भी फंस चुकी है। जिस सरकार में एमजे अकबर जैसे मंत्री हैं, जो सरकार यह दावा करती है कि हमारे प्रधानमंत्री मोदी जमीं तो क्या आसमां तक की खबर रखते हैं, वह सरकार अपने ही मंत्री की लंपटता और दुराचरण का इतिहास नहीं जानती है। यौन शोषण, बलात्कार के मामले वैसे भी असामान्य होते हैं, लेकिन अकबर का मामला असामान्य में भी असामान्य है- रेयरेस्ट ऑफ रेयर है। वैसे अभी इस कड़ी में राजनीति और मीडिया, फिल्म सहित सार्वजनिक जीवन के अनेक ‘महापुरुषों’ के नाम सामने आएंगे।

अभी तो एक ही मंत्री का नाम सामने आया है। मुमकिन है कि कुछ अन्य मंत्रियों के नाम भी सामने आएं। हो सकता है कि नाम सामने न भी आएं लेकिन इसका मतलब यह नहीं हो सकता कि इस तरह के और भी मंत्री नहीं होंगे। संभव है कि ऐसे कुछ मंत्रियों ने अकबर का नाम सामने आते ही अपने बचाव के अग्रिम इंतजाम कर लिए हों। यह अंदाजा इसलिए भी लगाना पड रहा है कि लगातार एक के बाद एक पीडित महिलाओं ने सामने आकर अपना दर्द बयां करते हुए रिपोर्ट लिखा दी है। लेकिन सरकार के आंख, कान, मुंह तीनों बंद हो गए हैं। इस सरकार के आते ही जब ललित मोदी देश छोड़कर भागा था, तब उसके रिश्ते सुषमा स्वराज और वसुंधरा राजे से जग जाहिर हुए थे। लेकिन सरकार ने अनदेखी की थी। सुषमा स्वराज विदेशों में जाकर पाकिस्तान के मामलों में और अभी-अभी संयुक्त राष्ट्र में जाकर जो गर्जना करके आई हैं वह कितनी बोगस है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जब पत्रकारों ने सुषमा स्वराज से प्रश्न किया कि अकबर आपके अधीनस्थ मंत्री है, आपका उन पर लगे आरोपों पर क्या कहना है तो वे सवाल को अनसुना करते हुए निकल गईं। यह सरकार अपने सबसे वरिष्ठ मंत्री अरुण जेटली के विजय माल्या से रिश्ते और माल्या के भागने से पहले जेटली से हुई मुलाकात को भी पचा जाती है। इस सरकार ने अपने समस्त नेताओं को देश को नुकसान पहुंचाने वाले सारे मामलों में बेलगाम होकर बोलने की छूट दी है। लेकिन यह सरकार और सत्तारू ढ पार्टी के सारे प्रवक्ता ऐसे समस्त मानवीय एवं संवेदनशील मामलों में चुप्पी लगा जाते हैं जहां उसके अपने कोई नेता फंसते दिखते हैं। इसलिए इस सरकार से न्याय की उम्मीद करना बेमानी है।

हाँ, एक बात सरकार के पक्ष में मानी जा सकती है। हर छोटे-बडे कांड में मोदी या उनकी सरकार के मंत्रियों की संलिप्तता रहती हो या न रहती हो, सरकार को कठघरे में तो खडा किया ही जाता है। लेकिन देश मे लगातार इस तरह के यौन उत्पीड़न और बलात्कार के मामलो की आ रही बाढ़ के बीच स्त्रियों जो जागरुकता आ रही है उसका श्रेय भी मोदी सरकार को दिया जाना चाहिए। आखिर ऐसी जागरुकता मोदी सरकार से पहले तो कभी देखने में नहीं आई थी।

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