पूर्व क्रिकेटर इमरान खान ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है। अब वह मुल्क के हुकूमतदार हैं तो पाकिस्तानी होने के नाते हम उनका स्वागत करते हैं। भारत के साथ संबंधों को लेकर पाकिस्तान के नेता जैसे पहले करते आए थे, इमरान भी उन्हीं के पदचिन्हों पर चलेंगे, इसकी तस्वीर उन्होंने अपनी पहली टिप्पणी में दर्शा दी है। लेकिन मुझे लगता है कि दोनों मुल्कों को परस्पर संबंध, व्यापारिक आदान-प्रदान, ओपन बॉर्डर के बाबत बात करने की दरकार है। सियासी कटुता को भूलकर मधुरता की नींव रखनी चाहिए। फिलहाल इन बातों को इमरान आगे बढ़ाएंगे, इसकी मुझे उम्मीद कम लगती है। लेकिन भारत-पाक के पास एक-दूसरे पर आंखें तरेरने का वक्त नहीं है। दोनों मुल्कों में अमन-शांति की बहाली होनी चाहिए। तल्खियां भूलकर दोनों मुल्कों को नई सुबह का स्वागत करना चाहिए। मुझे यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि इमरान खान को नई दोस्ती की पहल खुद आगे बढ़कर भारत के लिए करनी चाहिए। उनको नरेंद्र मोदी को सबसे पहले पाकिस्तान आने का न्यौता देना चाहिए। हो सकता है दोनों देशों की दुश्मनी दूर करने के लिए खुदा ने आपका ही चुनाव किया हो। ऐसा मौका इमरान खान को नहीं गंवाना चाहिए।

पाकिस्तान के भीतर सब कुछ एकदम दुरुस्त हो जाएगा, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन हां, मुल्क में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के उदय से वंशवाद और रसूख की राजनीति से कुछ हद तक छुटकारा जरूर मिला है। कुछ तुर्रम खांओं ने पाकिस्तान को अपनी जागीर समझ लिया था।

पीएम हाउस में न रहने और हर चीज में पारदर्शिता लाने की इमरान की बातें ठीक हैं। इमरान खान अगर ऐसा करते हैं तो बहुत अच्छा होगा। लेकिन सादगी से जीवन जीने की अदा उनमें हमने कभी देखी नहीं। इस्लामाबाद स्थित उनके आलीशान आवास में हर सुविधा मौजूद है। वह बादशाहों की तरह जीवन जीते हैं। मुझे नहीं लगता वह सादगी से जीवन जी पाएंगे। लेकिन वह कैसे भी रहें, फर्क नहीं पड़ता। सरकारी कामों में अगर पारदर्शिता लाते हैं तो बड़ी बात होगी।

(लेखक पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता और पूर्व मानवाधिकार मंत्री हैं)

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